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*दाम्पत्य जीवन और ज्योतिष शास्त्र फलकथन*

 *दाम्पत्य जीवन और ज्योतिष शास्त्र फलकथन*

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✍🏻जन्म कुंडली का सप्तम भाव पति-पत्नी का भाव भी होता है। गुरु, शुक्र और मंगल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं डॉ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया कि किसी की कुंडली में गुरु और शुक्र या दोनों में से एक भी ग्रह, पाप प्रभाव में हो तो उसके वैवाहिक जीवन में बाधा आती है। 

*२:-* सप्तम भाव और सप्तम भाव का स्वामी पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो पति-पत्नी में किसी न किसी बात पर लड़ाई-झगड़ा होता रहता है! 

*३:-* सप्तम भाव पर अगर सूर्य की पूर्ण दृष्टि हो और शनि, राहू मंगल में से एक भी ग्रह सप्तम भाव को देखे तो भी पति-पत्नी के बीच विवाद रहता है!

*४:-* सप्तम भाव और सप्तम भाव के स्वामी और गुरु या शुक्र पर सूर्य मंगल, शनि, राहू आदि का प्रभाव हो तो पति-पत्नी का संबंध विच्छेद होता है।

*५:-* सूर्य अगर सप्तम भाव में होगा, साथ में किसी भी पाप ग्रह की दृष्टि सप्तम भाव पर हो तो पति-पत्नी की आपस में नहीं बनेगी।

*६:-* लग्र, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भावों में से किसी भी एक भाव में मंगल होने से जातक मांगलिक हो जाता है। उसका विवाह मंगलीक से ही करना चाहिए अन्यथा पूरे जीवन भर पति-पत्नी दोनों के बीच  लड़ाई-झगड़ा रहता है.!

*७:-* जब भी किसी की कुण्डली में गुरु या शुक्र में से कोई भी एक ग्रह पाप ग्रहों से पीड़ित हो तो वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होगा....!!


*सरकारी नोकरी के योग*

 *सरकारी नोकरी के योग*

आजकल के जमाने में सरकारी नौकरी के योग होने के बावजूद कई लोगों की  सरकारी नौकरी नहीं लग पाती है  , इसका मुख्य कारण है कि यदि जब आपकी कुंडली में इससे संबंधित योग की दशा अंतर्दशा चल रही है उस समय सरकार के पास भी उससे संबंधित वैकेंसी होना अनिवार्य है ।  कई बार इस दोनों का मिलना होने के कारण योग होने के बावजूद भी सरकारी नौकरी नहीं लग पाती है  । परंतु यह बात भी है कि जिस की कुंडली में सरकारी नौकरी के योग  रहते हैं परंतु सरकारी नौकरी नहीं लगती यदि ऐसे व्यक्ति प्राइवेट नौकरी भी करें तो बहुत अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं या कई ऐसे लोगों को मैंने देखा है जिनकी कुंडली में सरकारी नौकरी का योग था परंतु उन्होंने स्वयं का कार्य प्रारंभ किया और उसमें कई लोगों को रोजगार दिया और बहुत आगे बढ़े ।

 💢  सरकारी नौकरी के लिए हमें क्या-क्या देखना चाहिए  ?

दशम भाव नौकरी  या रोजगार का भाव होता है  । कुंडली में दशम भाव एवं दशम भाव के स्वामी की स्थिति अच्छी होनी चाहिए  । नौकरी के लिए 6 भाव  एवं शनि  को भी देखा जाता है अतः उनकी स्थिति ठीक  होनी चाहिए । सरकारी नौकरी लगने के लिए सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रहों का प्रभाव विशेषकर दशम भाव से  होना चाहिए ।  जैसे  सूर्य मंगल या गुरु या चंद्रमा का प्रभाव ।

अब यदि आप किसी उच्च अधिकारी से संबंधित सरकारी नौकरी का प्रयास कर रहे हैं तो आपके शिक्षा का स्तर और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के अच्छे योग होने चाहिए  । पंचम भाव माध्यमिक परीक्षा के लिए होता है एवं नवम भाव उच्च शिक्षा के लिए होता है ,  अतः कुंडली में पंचम भाव एवं नवम भाव एवं इसके स्वामियों की स्थिति अच्छी होनी चाहिए ताकि व्यक्ति की पढ़ाई बहुत अच्छी हो और किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें । परंतु ऐसे भी बहुत से लोग होते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में 1 - 2 नंबर के लिए रह जाते हैं इसके बारे में समझते हैं  । ऐसा क्यों होता है  ? जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि ज्योतिष का फलादेश समय  , काल और स्थान और परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है ।  पहले के जमाने में बहुत कम लोग सरकारी नौकरी करते थे अतः जरा सी भी सरकारी नौकरी के योग होने पर लोगों की नौकरी लग जाती है परंतु इस वक्त जनसंख्या जरूरत से ज्यादा बढ़ चुकी है यदि एक पोस्ट के लिए सरकार के तरफ से वैकेंसी निकलती है तो कई हजार व्यक्ति उसके लिए परीक्षा देते हैं । ऐसे में सभी लोगों का सरकारी नौकरी लगना मुश्किल है  । अब इन सभी लोगों में जिसका भाग्य सबसे ज्यादा प्रबल होता है जो इन सभी लोगों से ज्यादा भाग्यशाली होते हैं उन्हीं की नौकरी लग जाती है ।  इसके लिए नवम भाव एवं इसके स्थिति अच्छी होनी चाहिए ताकि ऐसे व्यक्ति का  भाग्य कर्म के साथ सहयोग करें ।

मैंने बहुत से लोगों की कुंडली में देखा कि दशम भाव में सूर्य , चंद्रमा , मंगल  , गुरु की  ना दृष्टि थी ना प्रभाव था दशम भाव में मकर या  कुंभ राशि थी और शनि वहां विराजमान है या  दशम भाव पर  दृष्टि थी ऐसे लोगों की सरकारी नौकरी लग गई परंतु ऐसे लोगों की सरकारी नौकरी छोटे पोस्ट के लिए लगी जैसे चपरासी या मजदूरी करने वाले नौकरी ।

अब जैसे किसी व्यक्ति को बैंकिंग से संबंधित तैयारी करनी है तो ऐसे योग  में गुरु का द्वितीय भाव एवं दशम भाव से संबंध होना चाहिए जैसे मैंने बैंक अधिकारी की कुंडली देखी जिसमें द्वितीय भाव में गुरु विराजमान होकर दशम भाव में स्वराशि में देख रहे थे ।  उसी प्रकार सेना या पुलिस से संबंधित लोगों की कुंडली में मैंने देखा कि अधिकांश लोगों के तृतीय भाव में मंगल विराजमान होकर दशम भाव में अपने मित्र राशि में देख रहे थे  । मेरे पास ऐसी भी कुंडली आई जिसमें दशम भाव में सूर्य का प्रभाव था और लग्न में मंगल था तो ऐसे व्यक्ति की सेना में नौकरी लग गई ।

इसी प्रकार प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग योग होते हैं इनके बारे में विस्तार से समझना पड़ता है देखना पड़ता है ।

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि यदि किसी की कुंडली में सरकारी नौकरी का योग है  या कोई ज्योतिषी कह भी देता है तो आप उसके भरोसे हाथ से हाथ रखे नौ बैठे रहे  । 

प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पढ़ाई करते समय कोई ना कोई कला अवश्य सीखना चाहिए ताकि हमें सरकारी नौकरी मिले या ना मिले हम प्राइवेट जॉब में भी उन्नति कर सकें ।  बहुत से लोगों को मैंने देखा की पढ़ाई  कर लिए परंतु उन्होंने कोई कला नहीं सिखा किसी चीज की तैयारी नहीं की और बिना वजह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं ।  कभी इसमें फॉर्म भरते भरते हैं कभी उसमें भरते हैं  । इसलिए सबसे पहले आप अपने अंतरात्मा से पूछे आपको कौन सा कार्य अच्छा लगता है आप उसी कार्य पर अपना पूरा फोकस करें और उसी कार्य में आगे बढ़े । पूरा ध्यान केंद्रित कर कर उस कार्य को सीखे उसके बारे मे समझें और उसी की तैयारी करें या फिर अपनी कुंडली के हिसाब से भी आप देख सकते हैं कौन-कौन से कार्य करने के योग हैं  उसकी तैयारी करें । प्रत्येक कुंडली में एक या दो या तीन प्रकार के कार्य करने के योग होते है । उनसे संबंधित तैयारी करें लेकिन अपना ध्यान एक ही चीज पर फोकस करें तो ऐसे में यदि सरकारी नौकरी नहीं भी लगेगी तो आपका समय बर्बाद नहीं होगा आप प्राइवेट नौकरी भी करेंगे तो आपको अच्छी सफलता प्राप्त होगी । 

 मैंने ऐसे लोगों की कुंडली देखे हैं जिसमें दो तीन प्रकार से सरकारी नौकरी के योग हैं परंतु उन्होंने सरकारी नौकरी किया ही नहीं और वह अपना खुद का संस्था चला रहे हैं  जहां पर 20 - 25 व्यक्ति  कार्य करते हैं  । इसलिए सबसे पहले आप अपनी कुंडली को विस्तार से समझने का प्रयास करें और फिर उसके साथ अपने जीवन में आगे बढ़े और अपना ध्यान सिर्फ एक चीज पर केंद्रित करें ताकि आपको पूर्ण सफलता प्राप्त हो ।


♥️🌞 सुर्य का वृश्चिक राशि मे गोचर 16 नवंबर - 15 दिसंबर 2020🌞♥️



♥️सुर्य का गोचर♥️

 

♥️🌞 सुर्य का वृश्चिक राशि मे गोचर 16 नवंबर - 15 दिसंबर 2020🌞♥️


डॉ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया की वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य आत्मा, पिता, पूर्वज, राज्य सम्मान, नेत्र और राजनीति आदि का कारक है। सूर्य के शुभ प्रभाव से विभिन्न कार्यक्षेत्र में उच्च पद की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी मान-सम्मान मिलता है। वहीं दूसरी तरफ यदि कुंडली पर सूर्य का अशुभ प्रभाव हो तो जातक को आँख संबंधी समस्या का योग, पिता को कष्ट और पितृ दोष की स्थिति बनती है। इसलिए जन्म कुंडली में सूर्य से संबंधित किसी भी परेशानी के समाधान के लिए ज्योतिष विशेषज्ञ सूर्य ग्रह से जुड़े विभिन्न उपाय अपनाने की सलाह देते है। सूर्य के गोचर के दौरान जातक को कैसा फल प्राप्त होगा, यह केवल और केवल इस बात पर निर्भर करता है कि उस गोचर के दौरान सूर्य एक कुंडली या राशि से किस भाव में संचरण कर रहा है। क्योंकि सभी 12 भावों में सूर्य के गोचर का परिणाम अलग-अलग होता है। समस्त संसार को उत्तम आरोग्य और जीवन प्रदान करने वाले  सूर्य ग्रह का साल 2020 में 16 नवंबर 2020 को सुबह 06:40 पर अपनी नीच राशि तुला से निकलकर अपनी मित्र राशि वृश्चिक में प्रवेश कर जाएगा। यह 15 दिसंबर 2020 तक इस राशि में रहेगा और 21:19 पर धनु में प्रवेश करेगा। । सूर्य के गोचर काल के दौरान सभी राशि के जातकों को अलग-अलग फल मिलेंगे। सूर्य आत्मा का कारक ग्रह है और यह आपकी नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक क्षमता, पिता आदि का कारक है। यदि कुंडली में सूर्य मजबूत अवस्था में है तो ऐसा व्यक्ति राजा की तरह जिंदगी जीता है, वहीं जिस जातक की कुंडली में यह अच्छी अवस्था मे नहीं होता उसे जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर होगा। आईये इस भविष्यफल के माध्यम से जानते हैं समस्त 12 राशियों पर सूर्य के  गोचर का क्या प्रभाव पड़ने वाला है। 🌷


🌹💫यह भविष्यफल चंद्र राशि पर आधारित है।💫🌹

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 🌹सूर्य के गोचर का सभी राशियों पर असर होगा। हर राशियों पर होने वाले इसके प्रभाव कुछ इस तरह होंगे। यह राशि फल चन्द्र राशि पर आधारित है तथा  बहुत ही सामान्य आधार पर है अतः किसी विशेष परिस्थिति में अपनी कुंडली की जाँच कराकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचे . अच्छे या बुरे परिणाम आपकी वर्तमान दशा- अंतर दशा पर निर्भर करते हैं.

   


♥️卐0⃣ 1⃣ 🐑मेष :~ अ, ल, इ👉* :  सूर्य का यह गोचर मेष राशि के आठवें घर में होने वाला है। आठवें घर को परिवर्तन और अनुसंधानों का घर माना जाता है। सूर्य का यह गोचर मेष राशि के जातकों के लिए कुछ खास परिणाम लेकर नहीं आने वाला है। इस गोचर के दौरान मेष जातकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

सूर्य जिसे एक क्रूर ग्रह भी माना जाता है वह सीधे तौर पर मेष जातकों के दूसरे घर का प्रतिनिधित्व कर रहा है। दूसरा घर बचत, संचित धन और परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। यह बात इस तरफ इशारा करती है कि इस गोचर के दौरान मेष जातकों को आय से संबंधित कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है इसीलिए, सलाह दी जाती है कि इस समय के दौरान अपनी बचत और व्यय के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश करें।

इस गोचर के प्रभाव से आपकी वाणी भी थोड़ी कठोर हो सकती है, जिसका सीधा असर आपके पारिवारिक रिश्तों में पड़ सकता है। इसके अलावा इस गोचर के दौरान आपका आपके पिता के साथ रिश्ता थोड़ा डगमगा सकता है, इसलिए उनके साथ बात करते हुए अपनी वाणी पर उचित ध्यान रखें और संयम बनाए रखें।

कार्य क्षेत्र से जुड़े मेष जातकों के लिए ये समय सावधानी बरतने का होगा क्योंकि इस समय के दौरान आप किसी तरह के वाद-विवाद या बहस में पड़ सकते हैं जो उनके मानसिक तनाव में वृद्धि कराने वाला साबित हो सकता है। हालांकि सलाह दी जाती है कि इस दौरान शांति और धैर्य से काम लें क्योंकि इससे आपको अपनी परेशानी से निकलने में ज्यादा आसानी रहेगी। इसके अलावा अपने वरिष्ठ अधिकारियों और उच्च प्रबंधन के साथ भी किसी तरह की बहस या टकराव में शामिल होने से बचें।

सूर्य के इस गोचर से मेष राशि के जातकों का सरकारी एजेंसियों के साथ भी कुछ कठिनाइयों का सामना हो सकता है, इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि अपने टैक्स को समय पर भरें और ऐसा कोई भी काम ना करें जो सरकार की नीतियों के खिलाफ हो।

गोचर के प्रभाव से शादीशुदा जातक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर के थोड़ा चिंतित महसूस कर सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों को इस वक्त पढ़ाई में एकाग्रता में थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है जो उनके शैक्षिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

इस समय जितना हो सके जंक फूड, तले-भुने भोजन और मसालेदार भोजन से बचें। ध्यान और योग में अपना समय व्यतीत करें नहीं तो आपको आपके पेट या शरीर के निचले हिस्से से जुड़ी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 


♥️卐0⃣ 2⃣ 🐂वृषभ :~ ब, व, उ👉* :    सूर्य का यह गोचर वृषभ राशि के सातवें घर में होने वाला है। सातवें घर को जीवन साथी, व्यवसाय, और व्यावसायिक साझेदारी का घर भी माना जाता है। जैसा कि सूर्य वृषभ राशि के पहले घर पर प्रभाव डाल रहा है ऐसे में आप कभी-कभी अपने व्यवहार में कुछ अधिक आधिकारिक और हावी बन सकते हैं। आप के इस व्यवहार से आपके जीवन साथी और आपके प्रियजनों के बीच कुछ समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए जितना हो सके अपने साथी के प्रति विनम्र रहने की कोशिश करें और उन्हें उनका स्पेस देना ना भूलें। यह आपके और आपके पार्टनर के रिश्ते को और मजबूत बनाने में मददगार साबित होगा।

वृषभ राशि के जातक जो साझेदारी में व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें इस दौरान कुछ ग़लतफहमी और मतभेदों का सामना भी करना पड़ सकता है। जितना हो सके अपने साथी से बात करें जिससे आपको समस्या का हल निकालने में मदद मिलेगी। कार्य क्षेत्र से जुड़े वृषभ राशि के जातकों को इस समय के दौरान कार्य क्षेत्र पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों या सहयोगियों से कुछ अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि सलाह यही दी जाती है कि उनसे किसी भी तरह के वाद-विवाद में ना उलझे बल्कि बेहतर होगा कि आप शांति से इस स्थिति से बाहर निकल आएं। सही समय आने पर आप इस मुद्दे को बात करके सुलझाने का प्रयास भी कर सकते हैं। यदि आवश्यक नहीं है तो किसी भी यात्रा पर जाने से बचें क्योंकि इसमें सिर्फ आपका पैसा और समय व्यर्थ ही जाएगा। स्वास्थ्य के बारें में बात करें तो इस गोचर के दौरान आपको अपने पेट से जुड़ी किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि इस दौरान भरपूर मात्रा में पानी पिएं। इसके अलावा बहुत ज्यादा नमक और मसालों वाले खाने से दूर रहें। स्वस्थ रहने के लिए खुद को ऐसी शारीरिक गतिविधियों में शामिल करें जिसमें आपका जमकर पसीना निकले। यह आपके स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा।


♥️卐0⃣ 3⃣  💑मिथुन :~  क, छ, घ👉* : सूर्य का यह गोचर मिथुन राशि के जातकों के छठे घर में होने वाला है। छठे घर को प्रतियोगिताओं, चुनौतियों, और शत्रुओं का घर माना गया है। सूर्य का यह गोचर मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ फलदाई साबित होगा। स्वास्थ्य के लिहाज से भी सूर्य का यह गोचर मिथुन राशि के जातकों के लिए अच्छे परिणाम लेकर आने वाला साबित होगा क्योंकि इस दौरान आपको अपनी किसी लंबी चली आ रही बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य के गोचर का यह समय काफी अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि इस समय मिथुन जातकों की इच्छा शक्ति और दृढ़ता चरम पर होगी जो उन्हें इस दौरान किसी भी चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगी। इसके अलावा सूर्य का यह गोचर आपकी प्रतिस्पर्धी ऊर्जा में बढ़ोतरी करेगा जिससे आप अपने दुश्मनों पर बढ़त हासिल करने में कामयाब होंगे। कार्य क्षेत्र से जुड़े वो जातक जो नौकरी बदलने का प्रयास कर रहे हैं उन्हें इस समय के दौरान काफी अच्छे अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा मिथुन राशि के जातकों को उनके कार्य क्षेत्र में भी सफलता मिलेगी क्योंकि उच्च अधिकारी उनके काम की सराहना करेंगे। इस दौरान आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह का लोन लेने से बचें और किसी भी तरह के वाद-विवाद में ना पड़े। लेकिन अगर आप किसी उपक्रम में निवेश करना चाहते हैं या बचत करना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय काफी अच्छा साबित हो सकता है। इस समय सरकारी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए भी समय काफी अनुकूल रह सकता है। इस समय के दौरान आपकी सरकारी नौकरी का ख़्वाब पूरा होने की प्रबल संभावना है। 


♥️卐0⃣4⃣ 🦀कर्क :~ ड, ह👉* : सूर्य का गोचर कर्क राशि के जातकों के पांचवे घर में होगा। पांचवा घर संतान, बुद्धि, प्रेम और रोमांस का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य का यह गोचर कर्क राशि के जातकों के लिए मिले जुले परिणाम लेकर आने वाला साबित होगा। आपके पांचवें घर में सूर्य की मौजूदगी की वजह से आप आसानी से नाराज, आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन, और छोटी-छोटी पर बातों पर गुस्सा हो सकते हैं। जो आपके परिजनों के साथ रिश्ते में समस्या पैदा कर सकता है।

सूर्य की यह स्थिति आपको भावुक कर सकती है और आप आसानी से छोटी-छोटी बातों को अपने दिल पर ले लेंगे जो आपके और आपके प्रियजनों के बीच मतभेद पैदा करने वाली साबित होगी। ऐसे में आपको सलाह दी जाती है कि संयम से काम लें और अपने जीवन साथी के साथ खुलकर बात करें। यह आपके और आपके जीवनसाथी के रिश्ते को वांछित दिशा में ले जाने में मददगार साबित होगा। इस समय के दौरान अपने बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करें क्योंकि इससे आपको अपने अंदर के रचना रचनात्मक पहलुओं के बारे में पता चलेगा जो आपकी मुख्य ताकत है।

कार्यक्षेत्र से जुड़े जातकों को इस समय अवांछित देरी का सामना करना पड़ सकता है। जिससे आपके तनाव में वृद्धि होने की संभावना है। इसलिए इस समय के दौरान किसी भी नए काम को करने के बजाय आप अपने पहले से किये हुए काम की संरचना और उसकी योजना पर फिर से एक बार नज़र डालें और उन खामियों पर ध्यान देने की कोशिश करें जो आपके काम में देरी की वजह बन रही है। इससे सही समय आने पर आपको अपने प्रयासों के बेहतर परिणाम मिलने में मदद अवश्य मिलेगी।

तनाव और गुस्से में बढ़ोतरी की वजह से आपका स्वास्थ्य थोड़ा डगमगा सकता है। इसलिए आप चाहें तो इस समय के दौरान अपने शौक से एक बार दोबारा जुड़ सकते हैं। यह आपकी सकारात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप आपके स्वास्थ्य में सुधार अवश्य होगा। इसके अलावा यह समय छात्रों के लिए शुभ समय साबित हो सकता है क्योंकि सूर्य की यह स्थिति उन्हें बेहतर एकाग्रता और ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगी। इससे उन्हें अपने शिक्षाविदों में अच्छे मार्क्स मिलने में मदद होगी।


♥️卐0⃣5⃣ 🦁सिंह :~ म, ट👉* :  सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर उनके चौथे घर में हो रहा है। चौथा घर माता, आराम, सुख-सुविधाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस गोचर के परिणाम से सिंह जातक अपना सारा ध्यान अपने घर और परिवार पर केंद्रित करेंगे। इस समय आप कोशिश करेंगे कि आप अपने घर के लिए कुछ नया कर सकें। फिर आप घर का पुनर्निर्माण या उसकी साज-सज्जा में समय व्यतीत कर सकते हैं। इसके अलावा यह समय अचल संपत्ति की बिक्री और खरीद से जुड़े मामलों के लिए भी काफी अच्छा साबित हो सकता है।

परिवार के साथ समय व्यतीत करने के लिए यह समय काफी अनुकूल रहेगा। इस समय के दौरान आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं या घर पर भी आप अपने परिवार के साथ कुछ समय व्यतीत कर सकते हैं जिससे आपके और आपके परिवार के रिश्तों को मजबूती मिलेगी।

सिंह राशि के कुछ जातक नया वाहन खरीदने के लिए भी इच्छुक हो सकते हैं। हालांकि आपकी मां के स्वास्थ्य के लिहाज से यह समय ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाला है, जिसकी वजह से कुछ सिंह जातकों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

पेशेवर रूप से यह समय सिंह जातकों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आने वाला साबित होगा। कार्यक्षेत्र से जुड़े सिंह राशि के जातकों को इस समय वेतन वृद्धि या पदोन्नति का सुख भी मिल सकता है। कुछ सिंह जातकों के लिए यह समय दीर्घकालिक परियोजनाओं की योजना बनाने के लिए एक अच्छा समय साबित होगा। लेकिन जैसा की कुंडली का चौथा घर आराम और प्रतिभूतियों का प्रतिनिधित्व करता है ऐसे में आप कभी-कभी अपने व्यवसाय या पेशे में सुरक्षा का अधिक ख्याल रखने के बारे में विचार कर सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप कार्यक्षेत्र में आप ऐसे कामों के प्रति ज्यादा झुकाव महसूस करेंगे जिन कामों के लिए आप ज्यादा सहज/कम्फर्टेबल महसूस करते हैं। जिससे आप कार्य स्थल पर साहसिक निर्णय लेने से खुद को रोक सकते हैं।

सिंह जातकों के पार्टनर को इस समय कार्यक्षेत्र पर अच्छे नतीजे और सफलता मिल सकती हैं। जिससे आपके परिवार का माहौल खुशनुमा और संतोषजनक बना रहेगा। 

 


♥️卐0⃣6⃣ 👸🏼कन्या :~ प, ठ, ण👉*  सूर्य का यह गोचर कन्या राशि के तीसरे भाव में होने जा रहा है। तीसरा भाव पराक्रम, साहस और भाई बहनों का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य का यह गोचर आपको साहसी बनाएगा। कार्यक्षेत्र पर इस गोचर के दौरान आप नए निर्णय लेने से जरा भी नहीं कतराएंगे, जिसके परिणाम स्वरूप आप अपने उच्च प्रबंधन और सहकर्मियों के बीच उच्च स्थिति में नजर आएंगे। इसके अलावा कुछ कन्या जातक इस समय कार्यक्षेत्र पर सफलता हासिल करने में भी कामयाब होंगे।


ज्योतिष के भाववत सिद्धांत के अनुसार तीसरा घर संचित धन और बचत का भी प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यह बात इस तरफ इशारा करती है कि इस समय आप खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करने और धन सचिन संचित करने में कामयाब रहेंगे। भाई बहनों के साथ भी समय व्यतीत करने के लिए यह काफी अच्छा समय साबित होगा। इस गोचर के दौरान आपको आपके भाई बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। इस अवधि के दौरान की गई यात्रा सफल साबित होंगी और आपको लाभ अवश्य कराएंगी।

इस समय अवधि के दौरान आप अपनी इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में सफल रहेंगे। व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े जातकों के लिए भी यह समय काफी अच्छा रहने वाला है क्योंकि इस समय उनका काम सुचारु रुप से चल पाएगा। इस समय के दौरान उन्हें कुछ नए प्रस्ताव भी मिल सकते हैं जो उनके व्यवसाय में विस्तार और विकास करने में उनकी मदद करेंगे। इंटरनेट या मेल के माध्यम से आपको कुछ अच्छी खबरें मिल सकती हैं। साथ ही शिक्षा से जुड़े जातक इस समय का सही उपयोग करेंगे जिससे उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने में भरपूर मदद मिलेगी। 


♥️卐0⃣7⃣ ⚖तुला :~ र, त👉* :  तुला राशि के लिए सूर्य का यह गोचर उनके दूसरे घर में होगा। दूसरा घर संचित धन, बचत, परिवार और भाषण का प्रतिनिधित्व करता है। जैसा कि वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह को एक शुष्क ग्रह माना गया है ऐसे में सूर्य की यह स्थिति आपके लिए अपने प्रियजनों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करना थोड़ा मुश्किल बना सकती है। जिसके चलते आप कई पक्षों पर अपने विचार स्पष्ट तौर पर खुलकर तो रखेंगे लेकिन शायद आपके परिवार के कुछ सदस्यों को इसे समझने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

ऐसे में तुला जातकों को सलाह दी जाती है कि अपने प्रियजनों से खुलकर बात करें और अपनी भावनाएं उन तक स्पष्ट रूप से पहुंचाएं। इसके अलावा चूंकि सूर्य सफलता के ग्वारहवें घर का प्रतिनिधित्व करता है और वह दूसरे घर में स्थानांतरित हो रहा है ऐसे में यह बात स्पष्ट है कि इस दौरान आपका आय का प्रवाह अच्छा रहेगा। हाँ लेकिन इसको अच्छा ही बनाए रखने में आपको थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। धन के आने और धन खर्च का आपको इस समय खास ख्याल रखना होगा। वहीं बात अगर स्वास्थ्य की करें तो आंख और दांत दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां इस गोचर के दौरान आपको थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि अपने मुंह के क्षेत्र के आसपास उचित स्वच्छता बनाए रखें और अपनी आंखों पर ज्यादा दबाव ना डालें।  


♥️卐0⃣8⃣ 🦂वृश्चिक :~ न, य👉* : वृश्चिक राशि के लिए गोचर खास महत्व रखता है क्योंकि सूर्य वृश्चिक राशि में ही गोचर कर रहा है। इस गोचर के दौरान सूर्य आपके व्यक्तित्व और स्व घर में प्रवेश कर जाएगा। सूर्य जो आपके व्यवसाय और करियर के दसवें घर का स्वामी है वह इस गोचर के दौरान आपके पहले घर में स्थित होने जा रहा है।

सूर्य के इस गोचर के दौरान वृश्चिक राशि के जातक अपने करियर को लेकर उन्मुख रहेंगे। इस समय के दौरान आप सबसे आगे रहने के लिए बेहद प्रेरित रहेंगे और अपने लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए कोई कसर छोड़ते नहीं दिखेंगे। जिसके चलते आपको आपके उच्च स्तर के अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है। अगर आप कुछ नया शुरू करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह समय बेहद शुभ साबित हो सकता है, क्योंकि सूर्य की यह स्थिति आपके ध्यान, एकाग्रता और दृष्टि को बढ़ाएगी।

इस समय कोई भी निर्णय लेने के लिए आप खुद को पहले से अधिक आत्मविश्वासी, बोल्ड और स्वतंत्र महसूस करेंगे। हालांकि सबसे आगे रहने की इस होड़ में कभी-कभी आप दूसरों पर हावी भी हो सकते हैं जो कार्य क्षेत्र में आपके लिए ज्यादा अच्छा नहीं साबित होगा। व्यक्तिगत रूप से, सूर्य की यह स्थिति आपको अपने व्यवहार में आक्रामक बना सकती है। इस दौरान आप थोड़े परेशान भी रहेंगे जिसके चलते आपके रिश्ते में उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

ऐसे में सलाह दी जाती है कि इस समय के दौरान आप जितना शांत रह सके आपके लिए उतना अच्छा रहेगा। सूर्य की यह स्थिति आपको किसी अनचाही यात्रा पर भी जाने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि यह यात्रा आपके स्वास्थ्य के लिहाज से कुछ समस्याएं पैदा कर सकती है। ऐसे में कोशिश करें की इस समय अवधि में आपको किसी भी तरह की यात्रा ना करनी पड़े। इसके अलावा अपनी दिनचर्या में अगर आप योगा ध्यान और किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि को शामिल करते हैं तो स्वास्थ्य के संदर्भ में आपको सकारात्मक परिणाम अवश्य मिलेंगे।   


♥️卐0⃣9⃣ 🏹धनु :~ भ, ध,फ👉* :       सूर्य का यह गोचर धनु राशि के बारे में द्वादश घर में होगा। द्वादश घर विदेश यात्रा और विदेश से लाभ का घर माना गया है। इस गोचर के समय के दौरान कुछ ऐसे पुराने मुद्दे सामने आ सकते हैं जिनसे आपको निपटने और आगे बढ़ने की बेहद आवश्यकता है। इसलिए यह समय आपके लिए अकेले में कुछ समय बिताने के लिए भी बेहद अच्छा समय साबित हो सकता है, क्योंकि इस दौरान आप अकेले रहकर खुद का मूल्यांकन कर सकते हैं और खुद को फिर से जीवंत कर सकते हैं। इस अवधि में आपका एक नया रूप भी सबके सामने आएगा जिसमें आप उन लोगों की मदद करने के लिए ज्यादा इच्छुक नजर आएंगे जो खुद की मदद करते हैं।

कार्यक्षेत्र में आपको कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय अवधि के दौरान आपको अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने की राह में कुछ अनावश्यक बाधाओं का भी सामना करना पड़ सकता है। गोचर का ये समय आपके जीवन में दबाव की स्थिति पैदा कर सकता है जिसके चलते आप अपने करियर के मामले में स्थिर महसूस करेंगे।

इसके अलावा आर्थिक मामले पर भी धनु जातकों की स्थिति थोड़ी तंग रह सकती है। आप लम्बे समय से जिस पदोन्नति या वृद्धि के लिए इंतजार कर रहे थे उसमें अभी कुछ और समय भी लग सकता है। धैर्य और संयम से काम लेने की सलाह दी जाती है।

वहीं दूसरे हाथ पर इस समय के दौरान आपकी व्यय में वृद्धि होगी। ऐसे में सलाह यही दी जाती है कि किसी भी नए उद्यम या निवेश में हाथ डालने से पहले हर स्थिति का ठीक से मुआयना कर ले तभी उसमें निवेश करें। अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस समय के दौरान किसी पर भी अंधा विश्वास करने से सावधान रहें क्योंकि कोई भी उतना वफादार साबित नहीं होगा जितना आप उनके बारे में सोच रहे हैं।

प्यार और रोमांस के लिए भी यह समय कुछ ज्यादा शुभ नहीं साबित होगा क्योंकि इस दौरान आपके रिश्तो में बहुत सारी गलतफहमियां आ सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि जितना हो सके अपने प्रिय जन या अपने पार्टनर के साथ खुलकर बात करें जिससे चीजें आसान बनने में मददगार साबित होंगी।

बात अगर स्वास्थ्य के लिहाज से की जाए तो इस समय के दौरान आपके पेट और आंखें आपकी चिंता का विषय बन सकती हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि अपने आहार को नियंत्रण में रखने की कोशिश करें और आंखों पर बहुत ज्यादा तनाव ना डालें।


♥️卐1⃣0⃣ 🐏मकर :~ ख, ज👉* : सूर्य का यह गोचर मकर राशि के ग्यारहवें भाव में होने जा रहा है। ग्यारहवें भाव को सफलता, लाभ और समाज में प्रतिष्ठा का प्रतिनिधि माना गया है। यह बात इस तरफ इशारा करती है कि सूर्य का यह गोचर मकर राशि के जातकों के लिए शुभ परिणाम लेकर आने वाला साबित होगा। इस गोचर के समय अवधि में आपको कुछ ऐसे मुनाफ़े होंगे या आपको एक सफलताएँ मिलेंगी जिसका अपने लंबे समय से इंतजार किया है।

कार्य क्षेत्र से जुड़े जातकों को उनके कार्य स्थल में उनके प्रयासों के लिए प्रशंसा मिलेगी। सरकार या किसी वरिष्ठ अधिकारियों से आपको अप्रत्याशित लाभ मिलने की भी प्रबल संभावना है। मकर राशि के जातक जो व्यापार के क्षेत्र से जुड़े हैं उनको भी इस गोचर समय के दौरान अप्रत्याशित लाभ और उनके बिज़नेस में बढ़ोतरी दिखेगी। इसके अलावा अगर आप रियल स्टेट, प्रॉपर्टी या किस जमीन में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो उसके लिए भी यह समय बेहद ही अच्छा साबित हो सकता है।

व्यक्तिगत रूप से भी यह समय आपके लिए काफी अच्छा जाने वाला है क्योंकि इस समय आप किसी नए रिश्ते के बारे में सोच सकते हैं और यह रिश्ता भविष्य में एक मजबूत बंधन के रूप में भी परिवर्तित हो सकता है। वहीं विवाहित लोगों के लिए यह समय एक दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने का बेहतरीन समय होगा। यह समय आपके रिश्ते को और मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

इस दौरान आपके आपके पिता या पितातुल्य लोगों के साथ संबंध अच्छे होंगे, जिनसे आपको लाभ भी मिल सकता है। हालांकि भाई बहनों के साथ इस समय थोड़े बहुत वाद विवाद होने की आशंका है।

वहीं स्वास्थ्य के संदर्भ में बात करें तो यह समय आपको किसी भी बीमारियों से लड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा और जीवन में शक्ति प्रदान करने वाला साबित होगा। जिससे आपके स्वास्थ्य में सकारात्मक परिणाम नजर आएँगे। कुल मिलाकर बात की जाए तो मकर राशि के लिए गोचर बेहद ही शुभ होने वाला है। इस गोचर में उनको मन वांछित परिणाम प्रदान करने की क्षमता है। 


♥️卐1⃣1⃣ ⚱️कुंभ :~ ग, स, श, ष👉* : गोचर से कैरियर और पेशे के दसवें घर में मौजूद सूर्य इस बात की तरफ साफ इशारा कर रहा है कि कुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर लाभ देने वाला साबित होगा। नौकरी के क्षेत्र से जुड़े जातक जो किसी नई नौकरी की तलाश में हैं उन्हें इस समय के दौरान अच्छी नौकरी मिल सकती है। वहीं इसके अलावा जो लोग अपनी मौजूदा नौकरी में हैं उन्हें भी इस समय के दौरान कार्य स्थल में ही उच्च पदों पर आसीन होने का मौका भी मिलने की संभावना है। इस समय के दौरान आपके सहकर्मी और आपकी अधीनस्थ आपके काम और आपके प्रयासों में आपका भरपूर समर्थन करेंगे। जिससे कार्य स्थल में आपकी उत्पादकता और कार्य क्षमता बढ़ने की प्रबल संभावना नजर आ रही है।

इस समय के दौरान आपकी स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा आप कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों के संपर्क में भी आ सकते हैं जिससे भविष्य में आपको फायदा या मुनाफ़ा मिलेगा। आप इस समय सीमा के दौरान आवश्यक कौशल और अनुभव प्राप्त करने में सक्षम होंगे, जिससे आपके करियर में आपको बहुत लाभ मिलेगा।

हालांकि सूर्य की यह स्थिति कभी-कभी आपको अपने दृष्टिकोण में थोड़ा आक्रामक और अधिकार ज़माने वाला बना सकती है जो कार्य स्थल में आपके लिए कुछ संघर्ष की स्थिति पैदा करने वाला साबित हो सकता है। सलाह दी जाती है कि इस समय के दौरान विनम्र रहे जिसके परिणाम स्वरूप आपको इस गोचर से बेहतर परिणाम मिलने में मदद मिलेगी।

व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े जातकों के कुछ काम जो पिछले कुछ समय से अटके हुए थे उन्हें इस समय अवधि के दौरान अपने लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए मदद मिल सकती है। इसके अलावा इस समय अवधि में की गई यात्रा आपको शुभ परिणाम देने वाली साबित होगी। निजी तौर पर भी आपके रिश्ते और आपके परिवार के लिए अच्छा समय साबित होगा। इस गोचर के प्रभाव से आपके और आपके पिता के रिश्ते बेहतर बनेंगे।

निजी संबंधों की बात करें तो इस गोचर के प्रभाव से आपको अपने प्रियजनों और जीवन साथी से अच्छा सहयोग मिलेगा। जिससे आपके जीवन में ख़ुशियाँ और संतोष भरपूर मात्रा में रहेगा। आपके मित्र और आपके साथी भी इस अवधि के दौरान आपको आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। स्वास्थ्य के लिहाज से यह समय आपको ऊर्जा वान और जोश से भरपूर रखेगा। हालांकि अगर आप किसी तरह की शारीरिक गति विधि में लिप्त होते हैं तो इससे आपकी ऊर्जा को बेहतर दिशा में ले जाने में मदद मिलेगी। इससे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।


♥️卐1⃣2⃣ 🐠मीन :~ द, च👉* : सूर्य का यह गोचर मीन राशि के जातकों के नौवें घर में होगा। नौवां घर आध्यात्म, लंबी यात्रा, उच्च शिक्षा और भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य की इस स्थिति में आपको व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों ही मोर्चों पर लाभ मिलने के संकेत हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े जातक इस समय अपने परिश्रम और हार्ड वर्क से वांछित परिणाम पाने में सफल रहेंगे। खासकर वह छात्र जो सरकारी या किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आपकी राशि के नौवें घर में सूर्य के इस गोचर से आपके पिता को उनके पेशेवर जीवन में बड़ी सफलता और प्रगति मिलेगी। साथ ही इस समय के दौरान आपको आपके पिता से काफी सहयोग भी मिलने की संभावना है।

मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य सत्र विवाद प्रतियोगिताओं के छठे भाव का स्वामी है और गोचर के दौरान आपके नवम भाव में विराजमान है जो कि भाग्य भाव कहलाता है। यह बात इस तरफ साफ इशारा करती है कि इस गोचर के दौरान आप अपने दुश्मनों और प्रतियोगियों पर हावी होने में सक्षम रहेंगे। साथ ही अगर आपका कोई भी कानूनी केस चल रहा है तो इस समय उसका फैसला आपके पक्ष में आने की प्रबल संभावना है। इसके अलावा छठा घर पेशेवर सफलता को भी दर्शाता है। इसलिए मीन राशि के पेशेवर जातकों को भी इस समय में लाभ होने की संभावना है।

इस समय के दौरान आप अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और कोई भी बलिदान देने से झिझकेंगे नहीं। आपके द्वारा किए गए काम के लिए आपको अपने कार्य स्थल में उचित पहचान और प्रशंसा मिलेगी। इसके अलावा सरकारी परियोजनाओं से जुड़े हुए व्यवसायिओं को इस समय के दौरान नई परियोजनाओं और नए कार्यों से जुड़ने की प्रबल संभावना है।

इस गोचर के प्रभाव से आप अपने साथी के साथ अपने संबंधों को मजबूत बना सकते हैं। इसके अलावा तीर्थ यात्रा या किसी भी तरह की आध्यात्मिक की यात्राओं के लिए भी यह समय काफी अच्छा रहने वाला है। कुल मिलाकर यह समय आपके लिए काफी शुभ रहने वाला है। इस दौरान आपको काफी सारे सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। हालाँकि आपको सलाह दी जाती है कि इस दौरान कोई भी निर्णय लेने में समझदारी बरतें और अपने अहंकार को दूर रखें।

*वृश्चिक राशि में आ गए सूर्य देव, लाएंगे रेकॉर्ड तोड़ सर्दी और किसानों के लिए यह बड़ी खुशखबरी*

 *वृश्चिक राशि में आ गए सूर्य देव, लाएंगे रेकॉर्ड तोड़ सर्दी और किसानों के लिए यह बड़ी खुशखबरी*

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✍🏻ज्योतिष ग्रंथ बृहत् संहिता के अनुसार सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली से सर्दी में बोई जाने वाली फसलों के संबंध में फलकथन लिया जाता है डॉ अशोक श्रीश्रीमाल के अनुसार अक्टूबर के मध्य में जब सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं तब किसान रबी की फसल को लगाने की तैयारी कर रहे होते हैं, बृहत् संहिता में कहा गया है कि सूर्य से केंद्र में या सूर्य के दोनों ओर यदि शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र या बुध) आ जाएं तब सर्दी में बोकर गर्मी में काटी जाने वाली फसलें (जिन्हें वर्तमान में रबी फसल कहते हैं) अच्छी पैदावार देती हैं। इसके साथ ही सूर्य के वृश्चिक राशि प्रवेश की कुंडली से आगामी महीनों के सर्दी के मौसम का अनुमान भी लगाया जाता है।

✍🏻सूर्य का वृश्चिक राशि में प्रवेश 16 नवंबर को सुबह 6 बजकर 54 मिनट्स पर हुआ है। वृश्चिक लग्न की इस कुंडली में सूर्य के साथ जलीय ग्रह चन्द्रमा और छाया ग्रह केतु स्थित है। सूर्य से अगली राशि में गुरु तथा पिछली राशि में बुध स्थित है जिसके कारण इस वर्ष रबी की फसलों का बुवाई का रकबा बढ़ेगा और पैदावार भी उत्तम होगी। गेहूं, जौ, सरसों, मटर और तिलहन जैसे रबी की पारपंरिक फसलों की पैदावार अच्छी होगी। शनि इस समय गोचर में जलीय राशि मकर में चल रहे हैं जहां गुरु भी आगामी 20 नवंबर को उनसे युति करेंगे जिससे सर्दी जल्दी आएगी और देश के कई हिस्सों में अच्छी वर्षा होगी। इस वर्ष सर्दियों के मौसम में अच्छी वर्षा से रबी की फसल उत्तम होगी और प्रदुषण से आम-जनता को रहत मिलेगी, किन्तु सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश के समय केतु से युति होने के कारण कोरोना वायरस और अन्य श्वास संबंधी रोगों में वृद्धि होगी। दिसंबर और जनवरी के महीनों में शनि और गुरु की नज़दीकी अंशों में युति के कारण सर्दी पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ देगी.!!


*विवाह में बाधक योग ओर आपकी जन्म कुंडली*

 *विवाह में बाधक योग ओर आपकी जन्म कुंडली*

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✍🏻जन्म कुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को अशुभ माना जाता है, मंगल, शनि, राहु-केतु और सूर्य को क्रूर ग्रह माना जाता है।

 इनके अशुभ स्थिति में होने पर दांपत्य सुख में कमी आती है डॉ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया कि सप्तमाधिपति द्वादश भाव में हो और राहू लग्न में हो, तो वैवाहिक सुख में बाधा होना संभव है। 

सप्तम भावस्थ राहू युक्त द्वादशाधिपति से वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है। द्वादशस्थ सप्तमाधिपति और सप्तमस्थ द्वादशाधिपति से यदि राहू की युति हो तो दांपत्य सुख में कमी के साथ ही अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है।

 लग्न में स्थित शनि-राहू भी दांपत्य सुख में कमी करते हैं। सप्तमेश छठे, अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है।

 षष्ठेश का संबंध यदि द्वितीय, सप्तम भाव, द्वितीयाधिपति, सप्तमाधिपति अथवा शुक्र से हो, तो दांपत्य जीवन का आनंद बाधित होता है।

 छठा भाव न्यायालय का भाव भी है। सप्तमेश षष्ठेश के साथ छठे भाव में हो या षष्ठेश, सप्तमेश या शुक्र की युति हो, तो पति-पत्नी में न्यायिक संघर्ष होना भी संभव है। 

यदि विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करके उपरोक्त दोषों का निवारण करने के बाद ही विवाह किया गया हो, तो दांपत्य सुख अच्छा रहता है......!!

*भाई दूज (यम द्वितीया) विशेष*



पौराणिक महत्व

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शास्त्रों के अनुसार भाई को यम द्वितीया भी कहते हैं इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उन्हें लंबी उम्र का आशीष देती हैं और इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है  ब्रजमंडल में इस दिन बहनें यमुना नदी में खड़े होकर भाईयों को तिलक लगाती हैं। 


अपराह्न व्यापिनी कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 16 नवंबर सोमवार के दिन मनाया जाएगा।


भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई तथा बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव की स्थापना करना है। इस दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। यदि गंगा यमुना में नहीं नहाया जा सके तो भाई को बहन के घर नहाना चाहिए।


यदि बहन अपने हाथ से भाई को भोजन कराये तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन बहनें अपने भाइयों को चावल खिलाएं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। बहन चचेरी अथवा ममेरी कोई भी हो सकती है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है।


इस पूजा में भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल भी लगाती हैं उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए निम्न मंत्र बोलती हैं।


 "गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े" 


इसी प्रकार इस मंत्र के साथ हथेली की पूजा की जाती है 


" सांप काटे, बाघ काटे, बिच्छू काटे जो काटे सो आज काटे" 


इस तरह के शब्द इसलिए कहे जाते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के दिन अगर भयंकर पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे। कहीं कहीं इस दिन बहनें भाई के सिर पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और फिर हथेली में कलावा बांधती हैं। भाई का मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन मिस्री खिलाती हैं। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस सन्दर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा।


भैया दूज की कथा 

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भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।


यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।

यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है।


भाई दूज तिलक मुहूर्त

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भाई दूज पर भाई को तिलक करने के लिये राहुकाल के समय को अशुभ माना जाता है।


16 नवम्बर सोमवार के दिन सर्वार्थसिद्धि योग प्रातः 6:41 बजे से अपराह्न 2:33 बजे तक एवं सिद्धि योग प्रातः 6:41 बजे से कुछ ही समय तक रहेगा। इस दिन शुक्र ग्रह का अपनी तुला राशि मे प्रवेश रात्रि में होगा। इस दिन वृश्चिक की संक्रांति भी प्रातः 6:51 बजे से लग रही है। इस दिन राहू-काल प्रातः 8:00 बजे से 9:25 बजे तक रहेगा। इस समय मे भाई-दूज नहीं मनाना चाहिये।


भाई-दूज तिलक मुहूर्त:

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1. प्रातः काल अमृत के चौघड़िया में।

6:40 बजे से 8:00 बजे तक।


2.प्रातः काल शुभ के चौघड़िया में 9:20 बजे से 10:40 बजे तक।

 

3.अपराह्न काल चर-लाभ-अमृत के चौघड़िया मुहुर्त में 1:20 बजे से सांय काल 5:20 बजे तक,

दिवाली पूजा कैसे करे

 *दीपावली पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त*


डॉ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया की दिवाली पूजा कैसे करे। आए जाने-

हर वर्ष भारतवर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. प्रतिवर्ष यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. रावण से दस दिन के युद्ध के बाद श्रीराम जी जब अयोध्या वापिस आते हैं तब उस दिन कार्तिक माह की अमावस्या थी, उस दिन घर-घर में दिए जलाए गए थे तब से इस त्योहार को दीवाली के रुप में मनाया जाने लगा और समय के साथ और भी बहुत सी बातें इस त्यौहार के साथ जुड़ती चली गई।


“ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है. यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए. लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं।


दीपावली पूजन के लिए पूजा स्थल एक  दिन पहले से सजाना चाहिए पूजन सामग्री भी दिपावली की पूजा शुरू करने से पहले ही एकत्रित कर लें। इसमें अगर माँ के पसंद को ध्यान में रख कर पूजा की जाए तो शुभत्व की वृद्धि होती है। माँ के पसंदीदा रंग लाल, व् गुलाबी है। इसके बाद फूलों की बात करें तो कमल और गुलाब मां लक्ष्मी के प्रिय फूल हैं। पूजा में फलों का भी खास महत्व होता है। फलों में उन्हें श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े पसंद आते हैं। आप इनमें से कोई भी फल पूजा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। अनाज रखना हो तो चावल रखें वहीं मिठाई में मां लक्ष्मी की पसंद शुद्ध केसर से बनी मिठाई या हलवा, शीरा और नैवेद्य है।

माता के स्थान को सुगंधित करने के लिए केवड़ा, गुलाब और चंदन के इत्र का इस्तेमाल करें।


दीये के लिए आप गाय के घी, मूंगफली या तिल्ली के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करते हैं। पूजा के लिए अहम दूसरी चीजों में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र शामिल हैं।


चौकी सजाना

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(1) लक्ष्मी, (2) गणेश, (3-4) मिट्टी के दो बड़े दीपक, (5) कलश, जिस पर नारियल रखें, वरुण (6) नवग्रह, (7) षोडशमातृकाएं, (8) कोई प्रतीक, (9) बहीखाता, (10) कलम और दवात, (11) नकदी की संदूक, (12) थालियां, 1, 2, 3, (13) जल का पात्र


सबसे पहले चौकी पर लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजा करने वाले मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक है। दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अलावा एक दीपक गणेशजी के पास रखें।


मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं। नवग्रह व षोडश मातृका के बीच स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।


इसके बीच में सुपारी रखें व चारों कोनों पर चावल की ढेरी। सबसे ऊपर बीचों बीच ॐ लिखें। छोटी चौकी के सामने तीन थाली व जल भरकर कलश रखें। थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1. ग्यारह दीपक, 2. खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक।


इन थालियों के सामने पूजा करने वाला बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे।


हर साल दिवाली पूजन में नया सिक्का ले और पुराने सिक्को के साथ इख्ठा रख कर दीपावली पर पूजन करे और पूजन के बाद सभी सिक्को को तिजोरी में रख दे।


पूजा की संक्षिप्त विधि स्वयं करने के लिए

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पवित्रीकरण 

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हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा सा जल ले लें और अब उसे मूर्तियों के ऊपर छिड़कें। साथ में नीचे दिया गया पवित्रीकरण मंत्र पढ़ें। इस मंत्र और पानी को छिड़ककर आप अपने आपको पूजा की सामग्री को और अपने आसन को भी पवित्र कर लें।


शरीर एवं पूजा सामग्री पवित्रीकरण मन्त्र👇

ॐ पवित्रः अपवित्रो वा सर्वावस्थांगतोऽपिवा।


यः स्मरेत्‌ पुण्डरीकाक्षं स वाह्यभ्यन्तर शुचिः॥


पृथ्वी पवित्रीकरण विनियोग👇

पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग षिः सुतलं छन्दः


कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥


अब पृथ्वी पर जिस जगह आपने आसन बिछाया है, उस जगह को पवित्र कर लें और मां पृथ्वी को प्रणाम करके मंत्र बोलें-


पृथ्वी पवित्रीकरण मन्त्र👇

ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।

त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥

पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः


अब आचमन करें

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पुष्प, चम्मच या अंजुलि से एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ केशवाय नमः


और फिर एक बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ नारायणाय नमः


फिर एक तीसरी बूंद पानी की मुंह में छोड़िए और बोलिए-


ॐ वासुदेवाय नमः


इसके बाद संभव हो तो किसी किसी ब्राह्मण द्वारा विधि विधान से पूजन करवाना अति लाभदायक रहेगा। ऐसा संभव ना हो तो सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन कर गणेश जी का ध्यान कर अक्षत पुष्प अर्पित करने के पश्चात दीपक का गंधाक्षत से तिलक कर निम्न मंत्र से पुष्प अर्पण करें।


शुभम करोति कल्याणम, 

अरोग्यम धन संपदा, 

शत्रु-बुद्धि विनाशायः, 

दीपःज्योति नमोस्तुते ! 


पूजन हेतु संकल्प 

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इसके बाद बारी आती है संकल्प की। जिसके लिए पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें- ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं तत्सदद्य श्री पुराणपुरुषोत्तमस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय पराद्र्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे सप्तमे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बुद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गत ब्रह्मवर्तैकदेशे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2070, तमेऽब्दे शोभन नाम संवत्सरे दक्षिणायने/उत्तरायणे हेमंत ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे कार्तिक मासे कृष्ण पक्षे अमावस तिथौ (जो वार हो) शनि वासरे स्वाति नक्षत्रे आयुष्मान योग चतुष्पाद करणादिसत्सुशुभे योग (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया– श्रुतिस्मृत्यो- क्तफलप्राप्तर्थं— निमित्त महागणपति नवग्रहप्रणव सहितं कुलदेवतानां पूजनसहितं स्थिर लक्ष्मी महालक्ष्मी देवी पूजन निमित्तं एतत्सर्वं शुभ-पूजोपचारविधि सम्पादयिष्ये।


गणेश पूजन

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किसी भी पूजन की शुरुआत में सर्वप्रथम श्री गणेश को पूजा जाता है। इसलिए सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजा करें। 

इसके लिए हाथ में पुष्प लेकर गणेश जी का ध्यान करें। मंत्र पढ़े – गजाननम्भूतगणादिसेवितं 

कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। 

उमासुतं शोक विनाशकारकं 

नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।


गणपति आवाहन:👉 ऊं गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।। इतना कहने के बाद पात्र में अक्षत छोड़ दे।


इसके पश्चात गणेश जी को पंचामृत से स्नान करवाये पंचामृत स्नान के बाद शुद्ध जल से स्नान कराए अर्घा में जल लेकर बोलें- एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम् ऊं गं गणपतये नम:। 


रक्त चंदन लगाएं:👉 इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:, इसी प्रकार श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं। इसके पश्चात सिन्दूर चढ़ाएं “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:। दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को अर्पित करें। उन्हें वस्त्र पहनाएं और कहें – इदं रक्त वस्त्रं ऊं गं गणपतये समर्पयामि।


पूजन के बाद श्री गणेश को प्रसाद अर्पित करें और बोले – इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। मिष्ठान अर्पित करने के लिए मंत्र: इदं शर्करा घृत युक्त नैवेद्यं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं गं गणपतये नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। अब एक फूल लेकर गणपति पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नम:


इसी प्रकार अन्य देवताओं का भी पूजन करें बस जिस देवता की पूजा करनी हो गणेश जी के स्थान पर उस देवता का नाम लें।


कलश पूजन👉 इसके लिए लोटे या घड़े पर मोली बांधकर कलश के ऊपर आम के पत्ते रखें। कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत व् मुद्रा रखें। कलश के गले में मोली लपेटे। नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें। अब हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर वरुण देव का कलश में आह्वान करें। ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:। (अस्मिन कलशे वरुणं सांगं सपरिवारं सायुध सशक्तिकमावाहयामि, ओ३म्भूर्भुव: स्व:भो वरुण इहागच्छ इहतिष्ठ। स्थापयामि पूजयामि॥)


इसके बाद इस प्रकार श्री गणेश जी की पूजन की है उसी प्रकार वरुण देव की भी पूजा करें। इसके बाद इंद्र और फिर कुबेर जी की पूजा करें। एवं वस्त्र सुगंध अर्पण कर भोग लगाये इसके बाद इसी प्रकार क्रम से कलश का पूजन कर लक्ष्मी पूजन आरम्भ करे 


लक्ष्मी पूजन

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सर्वप्रथम निम्न मंत्र कहते हुए माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।


ॐ या सा पद्मासनस्था, 

विपुल-कटि-तटी, पद्म-दलायताक्षी।

गम्भीरावर्त-नाभिः, 

स्तन-भर-नमिता, शुभ्र-वस्त्रोत्तरीया।।

लक्ष्मी दिव्यैर्गजेन्द्रैः। मणि-गज-खचितैः, स्नापिता हेम-कुम्भैः।

नित्यं सा पद्म-हस्ता, मम वसतु गृहे, सर्व-मांगल्य-युक्ता।।


अब माँ लक्ष्मी की प्रतिष्ठा करें👉 हाथ में अक्षत लेकर मंत्र कहें – “ॐ भूर्भुवः स्वः महालक्ष्मी, इहागच्छ इह तिष्ठ, एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।”


प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएं और मंत्र बोलें – ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः।। इदं रक्त चंदनम् लेपनम् से रक्त चंदन लगाएं। इदं सिन्दूराभरणं से सिन्दूर लगाएं। ‘ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, कमलायै नमो नमः।। ॐ लक्ष्म्यै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’इस मंत्र से पुष्प चढ़ाएं फिर माला पहनाएं। अब लक्ष्मी देवी को इदं रक्त वस्त्र समर्पयामि कहकर लाल वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मा लक्ष्मी के क्रम से अंगों की पूजा करें।


माँ लक्ष्मी की अंग पूजा

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बाएं हाथ में अक्षत लेकर दाएं हाथ से थोड़े थोड़े छोड़ते जाए और मंत्र कहें – ऊं चपलायै नम: पादौ पूजयामि ऊं चंचलायै नम: जानूं पूजयामि, ऊं कमलायै नम: कटि पूजयामि, ऊं कात्यायिन्यै नम: नाभि पूजयामि, ऊं जगन्मातरे नम: जठरं पूजयामि, ऊं विश्ववल्लभायै नम: वक्षस्थल पूजयामि, ऊं कमलवासिन्यै नम: भुजौ पूजयामि, ऊं कमल पत्राक्ष्य नम: नेत्रत्रयं पूजयामि, ऊं श्रियै नम: शिरं: पूजयामि।


अष्टसिद्धि पूजा

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अंग पूजन की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंतोच्चारण करते रहे। मंत्र इस प्रकर है – ऊं अणिम्ने नम:, ओं महिम्ने नम:, ऊं गरिम्णे नम:, ओं लघिम्ने नम:, ऊं प्राप्त्यै नम: ऊं प्राकाम्यै नम:, ऊं ईशितायै नम: ओं वशितायै नम:।


अष्टलक्ष्मी पूजन 

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अंग पूजन एवं अष्टसिद्धि पूजा की ही तरह हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करें। ऊं आद्ये लक्ष्म्यै नम:, ओं विद्यालक्ष्म्यै नम:, ऊं सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:, ओं अमृत लक्ष्म्यै नम:, ऊं लक्ष्म्यै नम:, ऊं सत्य लक्ष्म्यै नम:, ऊं भोगलक्ष्म्यै नम:, ऊं योग लक्ष्म्यै नम:


नैवैद्य अर्पण

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पूजन के बाद देवी को “इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” मंत्र से नैवैद्य अर्पित करें। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि” बालें। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें। इदं आचमनयं ऊं महालक्ष्मियै नम:। इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें: इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं महालक्ष्मियै समर्पयामि। अब एक फूल लेकर लक्ष्मी देवी पर चढ़ाएं और बोलें: एष: पुष्पान्जलि ऊं महालक्ष्मियै नम:।


माँ को यथा सामर्थ वस्त्र, आभूषण, नैवेद्य अर्पण कर दक्षिणा चढ़ाए दूध, दही, शहद, देसी घी और गंगाजल मिलकर चरणामृत बनाये और गणेश लक्ष्मी जी के सामने रख दे। इसके बाद 5 तरह के फल, मिठाई खील-पताशे, चीनी के खिलोने लक्ष्मी माता और गणेश जी को चढ़ाये और प्राथना करे की वो हमेशा हमारे घरो में विराजमान रहे। इनके बाद एक थाली में विषम संख्या में दीपक 11,21 अथवा यथा सामर्थ दीप रख कर इनको भी कुंकुम अक्षत से पूजन करे इसके बाद माँ को श्री सूक्त अथवा ललिता सहस्त्रनाम का पाठ सुनाये पाठ के बाद माँ से क्षमा याचना कर माँ लक्ष्मी जी की आरती कर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के बाद थाली के दीपो को घर में सब जगह रखे। लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन करने के बाद, सभी को जो पूजा में शामिल हो, उन्हें खील, पताशे, चावल दे।

सब फिर मिल कर प्राथना करे की माँ लक्ष्मी हमने भोले भाव से आपका पूजन किया है ! उसे स्वीकार करे और गणेशा, माँ सरस्वती और सभी देवताओं सहित हमारे घरो में निवास करे। प्रार्थना करने के बाद जो सामान अपने हाथ में लिया था वो मिटटी के लक्ष्मी गणेश, हटड़ी और जो लक्ष्मी गणेश जी की फोटो लगायी थी उस पर चढ़ा दे।

लक्ष्मी पूजन के बाद आप अपनी तिजोरी की पूजा भी करे रोली को देसी घी में घोल कर स्वस्तिक बनाये और धुप दीप दिखा करे मिठाई का भोग लगाए।

लक्ष्मी माता और सभी भगवानो को आपने अपने घर में आमंत्रित किया है अगर हो सके तो पूजन के बाद शुद्ध बिना लहसुन-प्याज़ का भोजन बना कर गणेश-लक्ष्मी जी सहित सबको भोग लगाए। दीपावली पूजन के बाद आप मंदिर, गुरद्वारे और चौराहे में भी दीपक और मोमबतियां जलाएं।

रात को सोने से पहले पूजा स्थल पर मिटटी का चार मुह वाला दिया सरसो के तेल से भर कर जगा दे और उसमे इतना तेल हो की वो सुबह तक जग सके


माँ लक्ष्मी जी की आरती

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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता

तुम को निस दिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत

हर विष्णु विधाता .

ॐ जय लक्ष्मी माता ...


उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता

ओ मैया तुम ही जग माता .

सूर्य चन्द्र माँ ध्यावत, नारद ऋषि गाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


दुर्गा रूप निरन्जनि, सुख सम्पति दाता

ओ मैया सुख सम्पति दाता .

जो कोई तुम को ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता

ओ मैया तुम ही शुभ दाता .

कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की दाता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


जिस घर तुम रहती तहँ सब सद्गुण आता 

ओ मैया सब सद्गुण आता .

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता

ओ मैया वस्त्र न कोई पाता .

ख़ान पान का वैभव, सब तुम से आता

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता

ओ मैया क्षीरोदधि जाता .

रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता 

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता

ओ मैया जो कोई जन गाता .

उर आनंद समाता, पाप उतर जाता 

ॐ जय लक्ष्मी माता ..


दीपावली पूजन मुहूर्त

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दीपावली पूजन के लिये चार विशेष मुहूर्त होते है।


1👉 वृश्चिक लग्न👉 यह लग्न दीपावली के सुबह आती है वृश्चिक लग्न में मंदिर, स्कूल, हॉस्पिटल, कॉलेज आदि में पूजा होती है। राजनीति से जुड़े लोग एवं कलाकार आदि इसी लग्न में पूजा करते हैं।


2👉 कुंभ लग्न👉 यह दीपावली की दोपहर का लग्न होता है। इस लग्न में प्राय बीमार लोग अथवा जिन्हें व्यापार में काफी हानि हो रही है, जिनकी शनि की खराब महादशा चल रही हो उन्हें इस लग्न में पूजा करना शुभ रहता है।


3👉 वृषभ लग्न👉 यह लग्न दीपावली की शाम को बढ़ाएं मिल ही जाता है तथा इस लग्न में गृहस्थ एवं व्यापारीयो को पूजा करना सबसे उत्तम माना गया है।


4👉 सिंह लग्न👉 यह लग्न दीपावली की मध्यरात्रि के आस पास पड़ता है तथा इस लग्न में तांत्रिक, सन्यासी आदि पूजा करना शुभ मानते हैं।


अमावस्या तिथि प्रारंभ👉  14 नवम्बर 2020 pm 02:17 बजे,

अमावस्या तिथि समाप्त👉 15 नवम्बर 2020 am 10:36 बजे,


शुभ लग्न में पूजन का मुहूर्त

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इस दिन सायं 06:01 से 08:01 के तक वृष लग्न रहेगा. प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों रहने से लक्ष्मी पूजन के लिये यही मुहुर्त सर्वाधिक शुभ रहेगा।

सिंह लग्न काल 12:27 pm से 02:35am Nov 15

02:17 से 04;36 तक चर लाभ अमृत

06:00 pmसे 07:36pm तक लाभ

09:12pm से 01:59am तक शुभ अमृत चर 15Nov

05:10am से 06 :46am लाभ


निशीथ काल 

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14 नवम्बर रात्रि को 011:58 से 12:49 तक निशिथ काल रहेगा।


महानिशीथ काल

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महानिशीथ काल मे धन लक्ष्मी का आहवाहन एवं पूजन, गल्ले की पूजा तथा हवन इत्यादि कार्य सम्पूर्ण कर लेना चाहिए.  श्री महालक्ष्मी पूजन, महाकाली पूजन, लेखनी, कुबेर पूजन, अन्य वैदिक तांत्रिक मंन्त्रों का जपानुष्ठान किया जाता है।


दीपदान मुहूर्त

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लक्ष्मी पूजा दीपदान के लिए प्रदोष काल (रात्रि का पंचमांष प्रदोष काल कहलाता है) ही विशेषतया प्रशस्त माना जाता है। दीपावली के दिन प्रदोषकाल सायंकाल 06:00 से  08.33 बजे तक रहेगा।

चोपड़ा पूजन मुहूर्त

 🌟चोपड़ा पूजन- शारदा पूजन- कुबेर पूजन शुभ मुहूर्त 🌟 


💮 :~  दीपावली शुभ दिन

💮 चोपड़ा पूजन- शारदा पूजन- कुबेर पूजन

💮 आसों वद 14 शनीवार 14-11-2020 अत्यंत शुभ दिन 

💮 आज के दिन सभी राशि वाले  दुकान, ऑफ़िस, कारख़ाना, फ़र्म, व्यक्तिगत, राशि वाले के लिये  चोपड़ा पूजन करना ज़रूरी है

💮 आज कल कम्प्यूटर मै सब हिसाब रहेते है फिर भी कम से कम १ Dairy मे भी शारदा पूजन करना बहुत आवश्यक है १ शास्त्रीय प्रणालिका है

💮 इसकी विशेष विधी आपको ज़रूर भेजूगा 


समय :~ शाम को  6.00 से 7.30 ओर 9.30 से 11.00



|| व्यापार बाधानाशक उपाय ||

 




प्राय: देखने में आता है कि बहुत अच्छी चलती हुई दुकान या व्यावयाय अचानक ठप्प हो जाती है। कभी-कभी ऎसा भी होता है कि दुकान के बाहर लौंग सिन्दूर अथवा नींबू या लौहे की कीलें इत्यादि सामग्री भी मिलती है। परेशान होकर दुकान मालिक कहता है कि पहले तो दुकान अच्छी चलती थी शायद किसी ने बंधवा दी है या नजर लग गई है। ईष्र्यावश कुछ लोग ऎसा करने का प्रयाय भी करते है। यदि आपके साथ भी ऎसी समस्या है तो इससे अत्यन्त साधारण लेकिन प्रभावशाली उपाय द्वारा छुटकारा पाया जा सकता है। यह उपाय मंगलवार अथवा शनिवार को करना है। मंगलवार अथवा शनिवार के लिए काले घोडे की एक साबुत नाल ले लें। इस नाल को जल छिडक कर शुद्व कर लें। चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर नाल पर लेप कर दें।


इस लेप युक्त नाल को काला कपडा बिछा कर लकड़ी की चौकी पर रख दे तथा थोडे से काले उडद कटोरी में रख लें। एक लोटे मे जल रखें एवं 5 अगरबत्ति जला लें। नवग्रह को नमस्कार कर हनुमानजी से प्रार्थना करें कि नजर बाधा एवं ईष्र्यावश किए गए कृत्य को काट दें। ऎसा करने के बाद निम्न मंत्र के 1008 बार जाब करके जल में फूंक मारें। काले घोडे की नाल को यू आकर में दुकान में इस प्रकार जड दे कि प्रत्येक आगन्तुक की दृष्टि उपर पर पडे। जल को पूरी दुकान में छिडक कर शेष बचा जल बाहर चौराहे पर डाल आएं। भाग्य बदलें। उडद को दुकान के अंदर 7 बार घुमाकर (दीवारों के समानान्तर) चौराहे पर डाल दें। इस प्रयोग के करने के कुछ दिन बाद ही आप अपने व्यवहार को पुन: अच्छा चलता पाएंगे।


मंत्र -

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" ॐ नमो आदेश। तू ज्या नावें, भूत पले, प्रेत पले। खबीस पले, अरिष्ट पले, सब पले। न पले तर गुरू की, गौरखनाथ की, बीदयां ही चले। 

गुरू संगत, मेरी भगत चले मंत्र ईश्वरी वाचा। "


यह प्रयोग दुकान बढाते समय (संध्याकाल) मे करना चाहिए। 


बंधी दुकान खोलने अथवा नजर बाधा दूर करने हेतु अन्य प्रभावी उपाय है। यह उपाय करने से दुकान अथवा व्यापार स्थल पर प्रतिस्पर्धियों की बुरी नजर या उनके द्वारा ईष्र्यावश करवाए गए अनिष्ट उपायों से बचा जा सकता है | इस उपाय से अनिष्ट की संभावना समाप्त हो जाती है।

प्रात: स्नान करके एक बिना धुला नया लाल रंग का कपडा ले। इस कपडे को लकडी की चौकी अथवा पट्टे पर बिछा लेवें। इस पर 125 ग्राम काले उडद, 125 ग्राम काले तिल, सात लौंग, सात साबुत लाल मिर्च रखें। एक जटा वाला नारियल एवं 11 गोमती चक्र रखें। 


एक कटोरी मे सरसों का तेल भरकर रखें। हनुमानजी की एक तस्वीर रखकर उनके समक्ष घी का एक दीपक जलावें तथा लड्डू के प्रसाद का भोग लगाए। एक सादा मसाले का पान लगवाकर उसमे इलायची, लौंग लगावे। सभी सामग्री पर थोडा सा सिन्दूर छिडकें एवं हाथ जोडकर हनुमानजी से प्रार्थना करें कि विद्वेषवश किया गया अभिचार कर्म दूर हो। लाल चन्दन की मामला से हं हनुमते नम: का 108 बार जाप करें। जाप के पश्चात नारियल एवं गोमती चक्र को लाल वस्त्र मे बांध कर व्यवसाय पूजा स्थल मे रख दें। शेष समस्त सामग्री को दुकान पर 7 बार उसार कर तेल सहित पीपल की जड में रख दें। यह उपाय करने के पश्चात आप स्वयं आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि ठप्प पडा व्यवसाय पुन: तेजी से प्रारंभ हो रहा है। उक्त कृत्य करने के पश्चात बंदरों को स्वेच्छा से सामर्थ्य अनुसार केले अवश्य खिलावे |

*विक्रम संवत 2078 इस वर्ष राक्षस नाम संवत्सर होने के कारण*

 


 मेष राशि वाले को इस वर्ष 8: का लाभ 14 का खर्च और संवत्सर फल बराबर रहेगा


 वृषभ राशि दो का लाभ 8 का खर्च दो विश्वा संवत्सर जीतता है


मिथुन राशि 5 का लाभ 5 का खर्च 40 वा संवत्सर जीतता है


कर्क राशि 14 का लाभ 2 का खर्च 6 विश्वास समृतसर जता है


सिंह राशि दो का लाभ 14 का खर्च आठ विश्वा संवत्सर जीता है


 कन्या राशि पांच का लाभ पांच का खर्च 10 विश्वा संवत्सर जीतता है


 तुला राशि दो का लाभ 8 का खर्च संवत्सर पर बराबर


 वृश्चिक राशि वाले के लिए 8: का लाभ 14 का खर्च 10 विश्वास संवत्सर पर जीत है वृश्चिक राशि वाले की


धनु राशि के लिए 11 का लाभ पांच का खर्च 8  विश्वा संवत्सर पर जीत


मकर राशि के लिए 14 का लाभ 14 का खर्च 6 विश्वास संवत्सर पर जीता


कुंभ राशि के लिए 14 का लाभ 14  खर्च और चार विश्वास संवत्सर पर जीत


मीन राशि के लिए 11 का लाभ पांच का खर्च विश्वासंवत्सर पर जीत


♦ नोट 


जिन व्यक्ति की संवत्सर पर जीत रहती है वह उस यह वर्ष उनके लिए बहुत अच्छा निकलेगा। जिनकी संवत्सर पर जीत नहीं होती है उनके लिए समय अनुकूल नहीं रहता।


दिसंबर 2020 से नवंबर 2021 तक राशिफल 


•मेष राशि मेष राशि वाले के लिए यह वर्ष अनुकूल नहीं रहेगा मन में अशांति माता-पिता के लिए कष्ट खुद के शरीर से संबंधित कष्ट व्यापार व्यवसाय के लिए सर्विस वालों के लिए असंतोष कालक रहेगा व्यापारी अधिकारी किसान सर्विस वाले के लिए ठीक रहेगा।विविध प्रकार की बीमारियों का विशेष प्रकार से ध्यान रखिएगा चौक एक्सीडेंट का भय रहेगा आपको कोई अच्छा कार्य आप कर सकते हैं कोई अच्छा व्यापार व्यवसाय भूमि भवन से संबंधित मकान से संबंधित कार्य आप कर सकेंगे व्यापार अगर आप करते तो अच्छा फायदा मिलेगा। फिर भी आपको अनजान व्यक्तियों से विश्वास ना करें आपके साथ धोखा हो सकता है। आपको गणेश जी की आराधना करने चाहिए जिससे आपको सफलता प्राप्त हो।


•वृषभ राशि के लिए यह वर्ष आपको पति या पत्नी के सुरक्षा का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए बीमारी का ध्यान रखें बीमारियों का विशेष ध्यान रखिए।खान-पान का ध्यान रखिएगा पत्नी के स्वास्थ्य का ध्यान रखिएगा। व्यापार अच्छा चलेगा या अगर आपकी सैलरी से तो प्रमोशन के योग स्थानांतरण के योग बनते हैं  आर्थिक रूप से को आर्थिक रुप से अच्छा निकलेगा फिर भी आप को स्थानांतरण आदि का विशेष ध्यान रखिएगा खानपान की चीजों पर आप ध्यान दीजिएगा झूठी अफवाह से बचाएगा दो नंबर के लोगों के साथ आप व्यापार ना करें जिससे कि आपको परेशानी हो उनके साथ ना जाए जावे।


•मिथुन राशि आपके लिए यह वर्ष उत्तरोत्तर प्रगति यश मान-सम्मान प्राप्त देने वाला रहेगा अगर आप राजनीति क्षेत्र में तो आपको सम्मान प्राप्त होगा संतान पीड़ा आपको रह सकती हैं आपको विविध प्रकार के मान सम्मान की बजाय आपको कष्ट झेलने पड़ेंगे फिर भी आपको सम्मान के साथ जीना आता है यश प्रगति व्यापार-व्यवसाय राजनीतिक क्षेत्र में उन्नति सर्विस में प्रमोशन या स्थानांतरण के योग बनते हैं आपको हनुमान जी की माता जी की आराधना पीपल के जल चढ़ाना चाहिए विष्णु भगवान के मंदिर पर दर्शन करना चाहिए या पीपल को जल चढ़ाएं।


 •कर्क राशि के लिए क्लासिक के लिए व्यापार व्यवसाय उन्नति के योग बनते हैं परस्पर व्यापार के लिए अच्छी योगेश सर्विस वाले के लिए सफलता दायक है उन्नति आपको कोई अच्छा सफलता के योग प्राप्त होते हैं प्रमोशन के योग प्राप्त होते हैं भूमि भवन से संबंधित कार्य आप कर सकते हैं हो सके तो आपका कोई पुराना पेंडिंग का कार्य को आप निपटा लें तो आपके लिए सफलता प्राप्त होगी आपके घर पुत्र पढ़ाई करते हैं तो उसे विशेष सफलता के योग बनते हैं देश विदेश घूमने के योग बनते रहेंगे।


 •सिंह राशि के लिए आपका यह वर्ष माता पिता के लिए कष्टकारी हो सकता है माता पिता के स्वास्थ्य का जरूर ध्यान रखिएगा आपका जवाब शत्रु नाश करके आप के जितने सत्र होंगे आपके शत्रु समाप्त होते रहेंगे आपको राजनीतिक क्षेत्र से दूर रहना चाहिए ऐसा नहीं करने पर आपको कई प्रकार के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।सर्विस अगर आप करते हैं तो आपको यस आपको सर्विस करते हैं तो आप निश्चित रूप से अपनी सर्विस से मतलब रखिएगा जिससे कि आपको कोई नुकसान प्राप्त ना हो विशेष सुविधाएं आपको मिलते रहे। आपके शत्रु नाश होंगे और विविध प्रकार के शत्रु भी आपके पैदा होंगे जिससे आपको शत्रु बाधा न पहुंचा सके कल के जल चढ़ाते रहे हनुमान जी के मंदिर में माता जी के मंदिर पर आप दर्शन करते रहिएगा।


 •कन्या राशि आज की राशिफल देश विदेश जाने के योग बनते हैं अगर आप सर्विस करते हैं तो आपका स्थानांतरण होने के योग बनते हैं माता पिता के लिए यह वर्ष कष्टकारी हो सकता है माता पिता के स्वास्थ्य के बारे में जरूर ध्यान दीजिएगा पुत्र के कष्ट के लिए आप शिवजी का अभिषेक करते रहें पुत्र को कष्ट हो सकता है पुत्र के कष्ट के लिए शिव जी का अभिषेक करते रहें राजनीति क्षेत्र में सफलता दायक रहेगा वाहन मकान भूमि भवन से संबंधित व्यापार से संबंधित कार्य करेंगे तो सफलता प्राप्त होती रहेगी।


•तुला राशि आज की राशिफल जवस अत्यधिक खराब है आपको चाहिए कि आप अपनी बात को किसी को ना बता दे सचेत रहें आपके साथ धोखा धोखा हो सकता है अपहरण की घटनाएं हो सकती है पारिवारिक कलह कलह के कारण पुत्र आपके शत्रु हो सकते हैं भाई बंधु आपके कुटुम परिवार सत्र हो सकते हैं आपको विशेष सावधानी बरतना चाहिए आप देश विदेश की यात्रा पर न जावे जाते हैं तो बड़ी सावधानी के साथ आप जाइएगा व्यापार-व्यवसाय बड़ी सावधानी के साथ करिएगा घर का भेद किसी को ना बता दे आपको यश मान सम्मान भी प्राप्त होगा कई प्रकार की सफलता भी आपको प्राप्त होगी भूमि भवन से संबंधित कार्य कर सकते हैं।


 •वृश्चिक राशि पुत्र स्त्री का संबंध मधुर बना करके रखेगा बीमारी का ध्यान रखिएगा पुत्र पत्नी का स्वास्थ्य के बारे में ध्यान रखिएगा राज सम्मान प्राप्त होता रहेगा यश मान सम्मान भूमि भवन से संबंधित कार्य करेंगे पुत्र की पढ़ाई के लिए विशेष पुत्री की पढ़ाई के लिए विशेष सफलता के योग बनते हैं घर में अरे में नया कार्य होने की संभावना के पूर्ण योग बनते हैं।


 •धनु राशि आपको परिवार से सावधान रहना चाहिए परिवार को आप कोई भी बातें ना बता दे परिवार के लोगों से विशेष सावधानी बरतें आपको राज सम्मान प्राप्त होगा विदेश विदेश की यात्रा के योग बनते हैं व्यापार व्यवसाय में उन्नति प्राप्त होगी पुराना मित्र आपका कार्य करने वाला रहेगा गया हुआ धन वापस आएगा आपका धन किसी ने अगर दवा लिया तो वह मिल जाएगा कि व्यापार व्यवसाय में उन्नति होगी।


 •मकर राशि आज की राशिफल विशेष रुप से सावधानी बरती है क्या व्यापार-व्यवसाय उन्नति यश मान सम्मान प्राप्त होगा बीमारी से आप सावधान रहिएगा पत्नी की पीड़ा का ध्यान रखिएगा पुत्र का ध्यान रखिएगा विदेश जाने के योग बनते हैं या भूमि भवन से संबंधित कार्य आप कर सकते हैं व्यापार व्यवसाय में उन्नति प्राप्त होगी विवाह आदि संस्कार के योग बनते हैं।


• कुंभ राशि आपको अपने माता-पिता का स्वास्थ्य के बारे में ध्यान दीजिएगा आपको हनुमान जी या शनिदेव की आराधना करना चाहिए शिवजी की आराधना करें महामृत्युंजय अनुष्ठान करते रहें भूमि भवन से संबंधित कार्य विवाह आदि संस्कार का कार्य आपके घर पर हो सकता है पुत्र की या पुत्री की शादी के योग बनते हैं नए मेहमान आने के योग बनते हैं व्यापार व्यवसाय में उन्नति के योग बनते हैं राजनीतिक क्षेत्र में आप हैं तो सफलता दायक है राजनीतिक सफलता मिलेगी।


• मीन राशि आपके लिए यह वर्ष राजनीति क्षेत्र में सफलता दायक उन्नति के लिए सफलता दायक है अगर सर्विस वाले हैं तो आपको सम्मान प्राप्त होगा व्यापार यह तो उत्तम उत्तम व्यापार आपको फलीभूत होगा व्यापार से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे सर्विस वाले हैं तो आपके सर्विस से आपको अच्छा फायदा मिलेगा कहीं आपके प्रमोशन के योग भी बनते हैं और लापरवाही अगरबत्ती हैं तो आपके घर बैठने की वो भी बन जाते हैं सर्विस छूटने के योग भी बन जाते हैं इसलिए सर्विस का विशेष ध्यान दीजिएगा लापरवाही नहीं बरतें पत्नी व पुत्र पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में ध्यान दीजिएगा पुत्र की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दीजिएगा यह पुत्र की शादी के योग बनते हैं आपका मकान व्यापार यश मान सम्मान प्राप्त होगा ।

*धनतेरस से दीपावली और भाई दूज तक की तारीख को लेकर न हों भ्रमित, जानिए यहाँ सटीक जानकारी*


✍🏻हिंदू धर्म में दीपावली के त्योहार का विशेष महत्व है। दीपावली का पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज को समाप्त होता है डाॅ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया कि इस वर्ष दीपावली 14 नवंबर (शनिवार) को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ही भगवान श्रीराम लंकापति रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। भगवान श्रीराम की वापसी पर अयोध्या में घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया गया था। कहते हैं कि तभी से इस खुशी में दिवाली मनाई जाती है। हालांकि इस साल धनतेरस, नरक चतुर्दशी और दीपावली की तिथियों को लेकर लोगों के बीच असमंजस है.......

*जानिए धनतेरस, छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) और दिवाली की सही तिथि और शुभ मुहूर्त:-*

*✍🏻१:- धनतेरस:-* कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 13 नवंबर को मनाया जाएगा। डॉ अशोक श्रीश्रीमाल  के अनुसार त्रयोदशी 12 नवंबर की शाम से लग जाएगी। ऐसे में धनतेरस की खरीदारी 12 नवंबर को भी की जा सकेगी। हालांकि उदया तिथि में त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में धनतेरस 13 नवंबर को मनाया जाएगा।

*२:-छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी):-* इस साल छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 14 नवंबर को मनाई जाएगी। नरक चतुर्दशी पर स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:23 से सुबह 6:43 बजे तक रहेगा। चतुर्दशी तिथि 14 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट तक ही रहेगी। इसके बाद अमावस्या लगने से दिवाली भी इसी दिन मनाई जाएगी.!

*३:- शुभ दीपावली:-* 15 नवंबर की सुबह 10.00 बजे तक ही अमावस्या तिथि रहेगी। अमावस्या तिथि में रात में भगवान गणेश जी और मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। ऐसे में दिवाली भी इस साल *14 नवंबर* को मनाई जाएगी....

*1:-* पूजन का मुहूर्त शाम 5: 30 से 7:28 तक.!

*2:-* सिंह लग्न मुहूर्त रात्रि 11: 51 से 2:12 मिनिट तक।

*४:-गोवर्धन पूजा और भाईदूज:-* 15 नवंबर 2020 को गोवर्धन पूजा होगी और अंतिम दिन 16 नवंबर को भाई दौज या चित्रगुप्त जयंती मनाई जाएगी। दरअसल इस बार हिंदी पंचांग के अनुसार द्वितीय तिथि नहीं है जिसके कारण तिथि घट रही हैं......!!

कुबेर यंत्र का महत्व




*🌈कुबेर यंत्र के माध्यम से कुबेर देव की पूजा की जाती है। इस यंत्र की कृपा से धन प्राप्ति के योग बनते हैं और जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। इस यंत्र को घर या दफ्तर में स्थापित करने से भाग्य वृद्धि होती है। कुबेर के प्रभाव से अपार धन और आय नए साधनों का सृजन होता है।*


*धनतेरस के दिन से घर में*

धनकुबेर यंत्र की स्थापना करना चाहिए*। इसकी स्थापना से सुख-समृद्दि प्राप्त होती है और धनकुबेर का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। *कुबेर यंत्र की स्थापना मध्य रात्रि 12 बजे से रात्रि 3 बजे तक की जाती है। आपको बता दें कि इसी के साथ कुछ वास्तु उपाय भी किए जाते हैं। जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।* भगवान कुबेर की पूजा कर धनवान बनाने के लिए प्रार्थना की जाती है।


*कुबेर यंत्र के लाभ*


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यदि आप अपने धन को बुरी *नजर से बचाना चाहते हैं तो अपनी तिजोरी में कुबेर यंत्र की स्थापना करें। ऐसा करने से आपका धन सदैव संचित रहता है।*



*🌓कुबेर यंत्र की स्थापना से आय के मार्ग प्रशस्त होते हैं यानि आपको प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से धन की प्राप्ति होती है।* 


*🌞*इस यंत्र को गल्ले पर स्थापित करने से व्यापार में वृद्धि होती है और आय में बढ़त होती है।*


*🌳यदि आप नया बिजनेस शुरू करने जा रहे हैं तो यह यंत्र काफी मंगलकारी सिद्ध होता है*। 



*🌳कुबेर यंत्र सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है, जिसका स्वामी बृहस्पति है।* 


*🍁भाग्योदय के लिए कुबेर यंत्र को घर या कार्यालय में स्थापित करना चाहिए।*


कुबेर यंत्र स्थापना विधि आपको बताते हैं कि किस प्रकार किया जाये 

श्री कुबेर यंत्र (Kuber Yantra) की *स्थापना के दिन सबसे पहले प्रातकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर इस यंत्र के सामने दीप-धूप प्रज्जवलित करना चाहिए।* तत्पश्चात कुबेर यंत्र को गंगाजल या कच्चे दूध से अभिमार्जित करना चाहिए इसके *पश्चात 11 या 21 बार कुबेर मंत्र, 'ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:।' का जाप करना चाहिए*। वहीं अधिक शुभ फल पाने के लिए धन के देवता कुबरे से प्रार्थना करनी चाहिए। *इसके बाद इस यंत्र को तिजारो या अलमारी में स्थापित कर देना चाहिए।* इस यंत्र को स्थापित करने के पश्चात इसे नियमित रूप से धोकर इसकी पूजा करें ताकि इसका प्रभाव कम ना हो। यदि *आप इस यंत्र को बटुए या गले में धारण करते हैं तो स्नानादि के बाद अपने हाथ में यंत्र को लेकर उपरोक्त विधिपूर्वक इसका पूजन करें।*  


☘️कुबेर यंत्र का बीज मंत्र - *ॐ श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं, ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम*:


   तो इस *धनतेरस पर घर में कुबेर यन्त्र स्थापित अवश्य करे।*

*धनतेरस पर आरोग्य के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय*


डॉ अशोक श्रीश्रीमाल ने बताया धनतेरस यानी अपने धन, भाग्य और आरोग्य को तेरह गुणा बनाने और उसमें वृद्धि करने का दिवस इस दिन यमराज और भगवान धनवंतरी के साथ ही धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के स्वामी कुबेर की पूजा का बड़ा महत्त्व है।

 

महर्षि धन्वंतरी को आयुर्वेद व स्वस्थ जीवन प्रदान करने वाले देवता के रूप में भी पूजनीय है, स्वस्थ जीवन के लिए स्वास्थ्य के देवता धन्वंतरी की आराधना की जाती है।


शास्त्रों के अनुसार भगवान धनवंतरी देवताओं के वैद्य हैं। इनकी भक्ति और पूजा से रोगों से मुक्ति एवं  आरोग्य सुख - स्वास्थ्य  मिलता है। मान्यता है कि भगवान धनवंतरी विष्णु के अंशावतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धनवंतरी का अवतार लिया था। 

 *धनवंतरि की पूजा* 

रोगनाश की कामना के लिए भगवान धनवंतरि के मंत्र का जाप करें-


1  -  *ऊँ रं रूद्र रोगनाशाय धन्वन्तर्ये फट्।।*

 

2  - *सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।*

*गूढं निगूढं औषध्यरूपं, धनवंतरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।*


 *धन सम्पदा और ऐश्वर्य के लिए  कुबेर की पूजा* 


समस्त धन सम्पदा और ऐश्वर्य के स्वामी कुबेर के लिए धनतेरस के दिन शाम को 13 दीप समर्पित किए जाते हैं। 


मंत्र 

= *ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यादिपतये धनधान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।।* =


= *लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए  मंत्र* =


लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए अष्टदल कमल बनाकर कुबेर, लक्ष्मी एवं गणेश जी की स्थापना कर उपासना की जाती है। इस अनुष्ठान में पांच घी के दीपक जलाकर और कमल, गुलाब आदि पुष्पों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करना लाभप्रद होता है। 


- *ओम् श्रीं श्रीयै नम:*


-== *मान्यता अनुसार धनतेरस पर करने योग्य कुछ ज्योतिष उपाय* == 


- यदि आप धनतेरस के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक में दो काली गुंजा डाल दें, तो साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। आपका उधार दिया हुआ धन भी प्राप्त हो जाएगा।


- यदि आपके संचित धन का लगातार खर्च हो रहा है तो धनतेरस के दिन पीपल के पांच पत्ते लेकर उन्हे पीले चंदन में रंगकर बहते हुए जल में छोड़ दें।


- बरगद से पांच फल लाकर उसे लाल चंदन में रंगकर नए लाल वस्त्र में कुछ सिक्कों के साथ बांधकर अपने घर अथवा दुकान में किसी कील से लटका दें।


- यदि आपको अचानक धन लाभ की आशा हो तो धनतेरस के दिन शाम के समय पीपल वृक्ष के समीप तेल का पंचमुखी दीपक जलाएं।


-यदि व्यवसाय में बार-बार हानि हो रही हो या घर में बरकत ना रहती हो तो धनतेरस के दिन से गाय को रोज चारा डालने का नियम लें।


- यदि जीवन में आर्थिक स्थिरता नहीं हो तो धनतेरस के दिन दो कमलगट्टे लेकर उन्हें माता लक्ष्मी के मंदिर में अर्पित करें।


- यदि आप आर्थिक परेशानी से जुझ रहे हैं तो धनतेरस के दिन शाम को लक्ष्मीजी के मंदिर में नारियल चढ़ाएं।


-यदि आप निरंतर कर्ज में उलझ रहें हो तो धनतेरस के दिन श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर चढ़ाएं।


- धनतेरस के दिन गुलर के ग्यारह पत्तों को मोली से बांधकर यदि किसी वट वृक्ष पर बांध दिया जाए, तो आपकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।


- यदि आप आर्थिक समस्या से परेशान है, किंतु रूकावटें आ रही हों, तो आक की रूई का दीपक शाम के समय किसी तिराहे पर रखने से आपको धन लाभ होगा।


- जीवन स्थायी सुख-समृद्धि हेतु प्रत्येक धनतेरस की रात में पूजन करने वाले स्थान पर ही रात्रि में जागरण करना चाहिए।


- यदि व्यवसाय में शिथिलता हो तो केले के दो पौधे रोपकर उनकी देखभाल करें तथा उनके फलों को नहीं खाएं।


- पीत वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, सुपारी, एक सिक्का, ताँबे का टुकड़ा, चावल पोटली बना लें। इस पोटली को शिवजी के सम्मुख रखकर, धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें फिर आलमारी, तिजोरी, भण्डार में कहीं भी रख दें। यह धनदायक प्रयोग है। 


= *धनतेरस दीपदान का महत्व* =


धनतेरस की सायंकाल को  गृहलक्ष्मी द्वारा    यमदेव निमित्त दक्षिण दिशा में  दीपदान किया जाता है। मान्यता है  ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है और पूरा परिवार स्वस्थ रहता है।

 

NOTE --- 

==शास्त्रों के अनुसार एक पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार को कोई दुख नहीं सताता है। कभी भी पैसों की कमी नहीं रहती है। पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे नियमित रूप से जल अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बड़ा होगा आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती जाएगी, धन बढ़ता जाएगा। पीपल के बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए तभी आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होंगे।==


-- *धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त* ---

 

धनतेरस के दिन खरीदारी का शुभ मुहूर्तः

12 नवंबर को खरीदारी का शुभ मुहूर्त

रात्रि 11:30 से 1:07 बजे तक

13 नवंबर को खरीदारी का शुभ मुहूर्त-

सुबह 5:59 से 10:06 बजे तक

सुबह 11:08 से दोपहर 12:51 बजे तक

दोपहर 3:38 मिनट से शाम 5:00 बजे तक

झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास

 

पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती है, क्योंकि झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है।


विद्वानों के अनुसार झाड़ू पर पैर लगने से महालक्ष्मी का अनादर होता है। झाड़ू घर का कचरा बाहर करती है और कचरे को दरिद्रता का प्रतीक माना जाता है। 


जिस घर में पूरी साफ-सफाई रहती है वहां धन, संपत्ति और सुख-शांति रहती है। इसके विपरित जहां गंदगी रहती है वहां दरिद्रता का वास होता है।


 ऐसे घरों में रहने वाले सभी सदस्यों को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण घर को पूरी तरह साफ रखने पर जोर दिया जाता है ताकि घर की दरिद्रता दूर हो सके और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके। घर से दरिद्रता रूपी कचरे को दूर करके झाड़ू यानि महालक्ष्मी हमें धन-धान्य, सुख-संपत्ति प्रदान करती है।


वास्तु विज्ञान के अनुसार झाड़ू सिर्फ घर की गंदगी को दूर नहीं करती है बल्कि दरिद्रता को भी घर से बाहर निकालकर घर में सुख समृद्घि लाती है। 


झाड़ू का महत्व इससे भी समझा जा सकता है कि रोगों को दूर करने वाली शीतला माता अपने एक हाथ में झाड़ू धारण करती हैं।

यदि भुलवश झाड़ू को पैर लग जाए तो महालक्ष्मी से क्षमा की प्रार्थना कर लेना चाहिए।


जब घर में झाड़ू का इस्तेमाल न हो, तब उसे नजरों के सामने से हटाकर रखना चाहिए।

ऐसे ही झाड़ू के कुछ सतर्कता के नुस्खे अपनाये गये उनमें से आप सभी मित्रों के समक्ष हैं जैसे :-


 शाम के समय सूर्यास्त के बाद झाड़ू नहीं लगाना चाहिए इससे आर्थिक परेशानी आती है।


 झाड़ू को कभी भी खड़ा नहीं रखना चाहिए, इससे कलह होता है।


 आपके अच्छे दिन कभी भी खत्म न हो, इसके लिए हमें चाहिए कि हम गलती से भी कभी झाड़ू को पैर नहीं लगाए या लात ना लगने दें, अगर ऐसा होता है तो मां लक्ष्मी रुष्ठ होकर हमारे घर से चली जाती है।


 झाड़ू हमेशा साफ रखें ,गिला न छोडे ।


 ज्यादा पुरानी झाड़ू को घर में न रखें।


 झाड़ू को कभी घर के बाहर बिखराकर न फेके और इसको जलाना भी नहीं चाहिए।


 झाड़ू को कभी भी घर से बाहर अथवा छत पर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में चोरी की वारदात होने का भय उत्पन्न होता है। झाड़ू को हमेशा छिपाकर रखना चाहिए। ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां से झाड़ू हमें, घर या बाहर के किसी भी सदस्यों को दिखाई नहीं दें।


 गौ माता या अन्य किसी भी जानवर को झाड़ू से मारकर कभी भी नहीं भगाना चाहिए।


* घर-परिवार के सदस्य अगर किसी खास कार्य से घर से बाहर निकले हो तो उनके जाने के उपरांत तुरंत झाड़ू नहीं लगाना चाहिए। यह बहुत बड़ा अपशकुन माना जाता है। ऐसा करने से बाहर गए व्यक्ति को अपने कार्य में असफलता का मुंह देखना पड़ सकता है।


शनिवार को पुरानी झाड़ू बदल देना चाहिए।


सपने मे झाड़ू देखने का मतलब है नुकसान।


 घर के मुख्य दरवाजा के पीछे एक छोटी झाड़ू टांगकर रखना चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।


 पूजा घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्वी कोने में झाडू व कूड़ेदान आदि नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में बरकत नहीं रहती है इसलिए वास्तु के अनुसार अगर संभव हो तो पूजा घर को साफ करने के लिए एक अलग से साफ कपड़े को रखें।


 जो लोग किराये पर रहते हैं वह नया घर किराये पर लेते हैं अथवा अपना घर बनवाकर उसमें गृह प्रवेश करते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि आपका झाड़ू पुराने घर में न रह जाए। मान्यता है कि ऐसा होने पर लक्ष्मी पुराने घर में ही रह जाती है और नए घर में सुख-समृद्घि का विकास रूक जाता है।



[]•दीपावली और वास्तु•[]


सही दिशा में होनी चाहिए दीपक की लौ


सनातन धर्म एक महान हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाए जाते हैं, सुबह-शाम होने वाली पूजा में भी दीपक जलाने की परंपरा है। 

वास्तुशास्त्र विचार: दीपक जलाने व उसे रखने के संबंध में कई नियम बताए गए हैं, दीपक की लौ की दिशा किस ओर होनी चाहिए, इस संबंध में वास्तुशास्त्र में पर्याप्त जानकारी मिलती है। 

वास्तुशास्त्र में यह भी बताया गया है कि दीपक की लौ किस दिशा में होने पर उसका क्या फल मिलता है।

1. दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है।

2. दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दु:ख बढ़ता है।

3. दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धनलाभ होता है।

4. दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखने से हानि होती है। यह हानि किसी व्यक्ति या धन के रूप में भी हो सकती है। किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सपलता मिलती है।

5. किसी शुभ कार्य से पहले दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करने से शीघ्र ही सफलता मिलती है।

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:

दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नमोस्तुते

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शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां,

शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।

अग्निवास का मुहूर्त जानना

 

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(भू रुदन, भू रजस्वला, भू शयन, भू हास्य, किस पक्ष मे शुभ कार्य न करे, यज्ञ कुंड के प्रकार, कितना हवन किया जाए विस्तृत वर्णन?)


कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति – आवश्यक है , अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है ।


 इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन ‘अग्नि के वास ‘ का पता करना ताकि हवन का शुभ फल आपको प्राप्त हो सके ।


1👉  जिस दिन आपको होम करना हो, उस दिन की तिथि और वार की संख्या को जोड़कर 1 जमा (1 जोड़ ) करें फिर कुल जोड़ को 4 से भाग देवें- अर्थात् शुक्ल प्रतिपदा से वर्तमान तिथि तक गिनें तथा एक जोड़े , रविवारसे दिन गिने पुनः दोनों को जोड़कर  चार का भाग दें।


👉 यदि शेष शुन्य (0) अथवा 3 बचे, तो अग्नि का वास पृथ्वी पर होगा और इस दिन होम करना कल्याणकारक होता है ।


👉 यदि शेष 2 बचे तो अग्नि का वास पाताल में होता है और इस दिन होम करने से धन का नुक्सान होता है ।


👉 यदि शेष 1बचे तो आकाश में अग्नि का वास होगा, इसमें होम करने से आयु का क्षय होता है ।


अतः यह आवश्यक है की होम में अग्नि के वास का पता करने के बाद ही हवन करें ।


शास्त्रीय विधान के अनुसार वार की गणना रविवार से तथा तिथि की गणना शुक्ल-पक्ष की प्रतिपदा से करनी चाहिए तदुपरांत गृह के ‘मुख-आहुति-चक्र ‘ का विचार करना चाहिए ।


मान लो आज हम कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि मे चल रहे है तो ।


शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक 15 तिथि तो कुल योग आया 15 + 4 + 1 = 20


आज कौन सा दिन हैं और इस दिन को रविवार से गिने। मानलो आज बुधवार हैं तो रविवार से गिनने पर बुधवार 3 आया । कुल योग 20 + 3 = 23/4 कर दे तो शेष कितना बचा।  4 - 23 / 5


👉 20 में 4 के भाग में 3 को शेष कहा जायेगा । परिणाम इस प्रकार से होंगे ।


👉 शेष 0 तो अग्नि का निवास पृथ्वी पर ।


👉 शेष 1 तो अग्नि का निवास आकाश मे ।


👉 शेष 2 तो अग्नि का निवास पाताल मे ।


👉 शेष 3 बचे तो पृथ्वी पर माने ।


पृथ्वी पर अग्नि वास सुख कारी होता हैं । आकाश मे प्राणनाश और पाताल मे धन नाश होता हैं । मतलब हमें वह तिथि चुनना हैं जिस तिथि मे शेष 3 बचे ।


वह तिथि ही लाभकारी होगी । प्रज्वलित अग्नि के आकार को देख कर कई नाम रखे गए हैं । पर अभी उनसे हमें सरोकार नही हैं । इस तरह से अग्नि वास का पता हमें लगाना हैं।


भू रुदन :- 

〰️〰️〰️                                                                       हर महीने की अंतिम घडी, वर्ष का अंतिम् दिन, अमावस्या, हर मंगल वार को भू रुदन होता हैं । अतः इस काल को शुभ कार्य भी नही लिया जाना चाहिए । 


यहाँ महीने का मतलब हिंदी मास से हैं और एक घडी मतलब 24 मिनिट हैं । अगर ज्यादा गुणा न किया जाए तो मास का अंतिम दिन को इस आहुति कार्य के लिए न ले।


भू रजस्वला :-

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इस का बहुत ध्यान रखना चाहिए ।यह तो हर व्यक्ति जानता हैं की मकरसंक्रांति लगभग कब पड़ती हैं । अगर इसका लेना देना मकर राशि से हैं तो इसका सीधा सा तात्पर्य यह हैं की हर महीने एक सूर्य संक्रांति पड़ती ही हैं और यह एक हर महीने पड़ने वाला विशिष्ट साधनात्मक महूर्त होता हैं । 


तो जिस भारतीय महीने आपने आहुति का मन बनाया हैं ठीक उसी महीने पड़ने वाली सूर्य संक्रांति से (हर  लोकलपंचांग मे यह दिया होता हैं । लगभग 15 तारीख के आस पास यह दिन होता हैं । मतलब सूर्य संक्रांति को एक मान कर गिना जाए तो 1, 5, 10, 11, 16, 18, 19 दिन भू रजस्वला होती हैं ।


भू शयन :-

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 आपको सूर्य संक्रांति समझ मे आ गयी हैं तो किसी भी महीने की सूर्य संक्रांती से 5, 7, 9, 15, 21 या 24 वे दिन को भू शयन माना

जाया हैं ।


 सूर्य जिस नक्षत्र पर हो उस नक्षत्र से आगे गिनने पर 5, 7,9, 12, 19, 26 वे नक्षत्र मे पृथ्वी शयन होता हैं । इस तरह से यह भी

काल सही नही हैं ।


भू हास्य क्या है ?

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भू हास्य👉 तिथि मे पंचमी ,दशमी ,पूर्णिमा ।

वार मे - गुरु वार ।


नक्षत्र मे👉  पुष्य, श्रवण मे पृथ्वी हसती हैं ।

अतः इन दिनों का प्रयोगकिया जाना चाहिए ।


गुरु और शुक्र अस्त👉  यह दोनों ग्रह कब अस्त होते हैं और कब उदित ।


आप स्थानीय पंचांग मे बहुत ही आसानी से देख सकते हैं और इसका निर्धारण कर सकते हैं । अस्त होने का सीधा सा मतलब हैं की ये ग्रह सूर्य के कुछ ज्यादा समीप हो गए और अब अपना असर नही दे पा रहे हैं ।


 क्यूंकी इन दोनों ग्रहो का प्रत्येक शुभ कार्य से सीधा लेना देना हैं । अतः इनके अस्त होने पर शुभ कार्य नही किये जाते हैं और इन दोनों के उदय रहने की अवस्था मे शुभ कार्य किये जाना चाहिये ।


आहुति कैसे दी जाए :-

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👉 आहुति देते समय सामग्री को अपने सीधे हाँथ के मध्यमा और अनामिका और अंगूठे का सहारा ले कर उसे प्रज्ज्वलित अग्नि मे ही छोड़ा जाए ।


👉  आहुति हमेशा झुक कर डालना चाहिए वह भी इस तरह से की पूरी आहुति अग्नि मे ही गिरे ।


👉 जब आहुति डाली जा रही हो तभी सभी एक साथ स्वाहा शब्द बोले ।


(यह एक शब्द नही बल्कि एक देवी का नाम है )


👉  जिन मंत्रो के अंतमे स्वाहा शब्द पहले से हैं उसमे फिर से पुनःस्वाहा शब्द न बोले यह ध्यान रहे।


वार 👉  रविवार और गुरुवार सामन्यतः सभी यज्ञों के लिए श्रेष्ठ दिवस हैं । शुकल पक्ष मे यज्ञ आदि कार्य कहीं ज्यादा उचित हैं ।


किस पक्ष मे शुभ कार्य न करे :-

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ग्रंथ कार कहते हैं की जिस पक्ष मे दो क्षय तिथि हो मतलब वह पक्षः 15 दिन का न हो कर 13 दिन का ही हो जायेगा उस पक्ष मे समस्त शुभ कार्य वर्जित हैं । 


ठीक इसी तरह अधि़क मास या मल मास मे भी यज्ञ कार्य वर्जित हैं ।


किस समय हवन आदि कार्य करें :-

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 सामान्यतः आपको इसके लिए पंचांग देखना होगा । उसमे वह दिन कितने समय का हैं । उस दिन मान के नाम से बताया जाता हैं । 


उस समय के तीन भाग कर दे और प्रथम भाग का उपयोग यज्ञ अदि कार्यों के लिए किया जाना चाहिए । साधारण तौर से यही अर्थ हुआ की की दोपहर से पहले यज्ञ आदि कार्य प्रारंभ हो जाना चहिये । 


हाँ आप राहु काल आदि का ध्यान रख सकते हैं और रखना ही चहिये क्योंकि यह समय बेहद अशुभ माना जाता हैं ।


 डॉ अशोक श्रीश्रीमाल